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सफेद संगमरमर में ढला ताज

यमुना नदी के किनारे

नीले पानी के साथ

बना है ऐतिहासिक ताजमहल

कहते हैं वो निशानी है किसी के प्यार मोहब्बत की

शायद इसीलिए कई वर्षों से

खड़ा होकर ताकता रहता है

मोहब्बत करने वालों को

मैं देख नहीं पाया हूँ अभी तक ताजमहल

पर जब भी कहीं

देखता हूँ ताज की तस्वीर

महसूस कर लेता हूँ ताज का आकर्षण

वो संगमरमर से तराशा हुआ

सफ़ेद ताज खड़ा है पूरी शान के साथ

और बस हुआ है हर एक हिंदुस्तानी के दिल में

जो खींच लाता है

अपने चाहने वालो को चाहे वो देश के

किसी कोने में क्यों न हो…..

(रचनाकार संजय भास्कर कवि और अच्छे समीक्षक हैं)

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मुसीबत के सिवा कुछ भी नहीं (कविता)

 

कुछ रिश्ते अनाम होते हैं (कविता)

 

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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कविताः बेटियां

तस्वीरः गूगल साभार

– मीना भारद्वाज

पेड़ों की डाल से

टूट कर गिरे चन्द फूल‎

अलग नहीं हैं

ब्याह के बाद की बेटियों से।

आंगन तो है अपना ही

पर तब तक ही

जब तक साथ था

डाल और पत्तियों‎ का।

अब ताक रहे हैं

एक दूसरे को यूं

जैसे  घर आए मेहमान हों।

बेटियां भी तो मेहमान ही

बन जाती हैं तभी तो

पराया धन कहलाती हैं।

आयेगा एक हवा का झोंका

और एक दूसरे से कह उठेंगे यूं

अब के बिछड़े ना जाने

कब मिलेंगे।

यदि मिले इस जन्म‎ में तो

बस चन्द लम्हों के लिए

मेहमानों की तरह मिलेंगे।

(लेखिका मीना भारद्वाज जी मंथन नाम से ब्लॉग भी लिखती हैं)

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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