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चौपाल

कविताः पंछी पपीहा की व्यथा

वृक्ष धरा के हैं आभूषण, करते हैं नित दूर प्रदूषण अखिल विश्व के जीवन में नित जीवन रक्षक वायु बहाते सुंदर छाह पथिक को देते, राहगीर भी चलते-फिरते शरणागत हो जाते इनके। कवि चन्द्रशेखर तिवारी…


कविताः पागल

दुनिया में हर कोई पागल है कोई किसी के प्यार में पागल है; कोई किसी के तकरार में पागल है; कोई पागल है इजहार-ए-मुहब्बत में तो, कोई किसी के इन्कार में पागल है!   कोई…


प्यार करने का हश्र यह हुआ कि आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे

मजबूरियां- हमारी अधूरी कहानी आज के परिवेश की एक अधूरी परन्तु सच्ची प्रेम कहानी है। जहाँ एक तरफ आदमी चाँद पर पहुँच गया है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग अपने घरों से निकलना नहीं चाहते हैं।…


कविताः मगर क्या

मन में है कि मैं कुछ आज लिखूं, मगर क्या अपने मूल्यों को खोता संविधान लिखूं दर्दों से कराहता हिन्दुस्तान लिखूं गुड़िया, दामिनी के शोर को लिखूं या फिर मुल्क की सियासत के चोर लिखूं…