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चौपाल

कविताः बेटियां

– मीना भारद्वाज पेड़ों की डाल से टूट कर गिरे चन्द फूल‎ अलग नहीं हैं ब्याह के बाद की बेटियों से। आंगन तो है अपना ही पर तब तक ही जब तक साथ था डाल…


कविताः फ़िर कल

-बिकाश आनंद आंखें तरस रहीं, पलकें बरस रहीं, न जाने तन बदन में, ये कैसी हो रही हलचल ओह, फ़िर कल… रात न कटी, दिन जो है डटी , न जाने कब लौटेगा, ये बीत…


लाल किले में खुलेंगे चार नए संग्रहालय, जानिए इतिहास को प्रतिबिंबित करने का कैसे करेंगे ये काम

-सुकृति गुप्ता द टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय लाल किला में चार नए संग्रहालय खोलने जा रही है। इन संग्रहालयों के अगले महीने तक खुल जाने की संभावना है।…


कविताः मां कहां हो तुम

-देवेश अग्रवाल मैंने कभी उसकी एक झलक नहीं देखी पर हर जगह उसका साया पाया है सुना है उसको सब मां कहते हैं कभी उसका चेहरा नहीं देख सका मैं पैदा हुआ तो सोचा भगवान…