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चौपाल

कविताः क्या अब भी वो शर्माती होगी

-नीरज सिंह अब भी क्या वो शर्माती होगी फ्रॉक पहने वो इतराती होगी अभी भी वो छोटी वाली लाल बिंदी लगाती होगी दो चुटिया करके क्या अभी वो आती होगी क्या वो अब भी शर्माती…


कविताः फ्लाई ओवर (पुल)

-संजय भास्कर  फ्लाईओवर के बारे में कविता लिखना कोई आसान काम नहीं है। फ्लाईओवर के बारे में कविता लिखने से पहले शहर के लोगों के विचार जान लेने जरूरी हैं, जो हर रोज या अक्सर…


कविताः बूढ़ा पीपल

-रेवा बहुत खुश था वो गांव के चौराहे पर खड़ा बूढ़ा पीपल,   बरसों से खड़ा था अटल सबके दुःख सुख का साथी लाखों मन्नत के धागे खुद पर ओढ़े हुए, कभी पति की लम्बी…


कविताः फूले हुए पेट

-सुकृति गुप्ता मैं उन बच्चियों को देखती हूँ बारह, तेरह, चौदह, पंद्रह बरस की उनके चेहरे की मासूमियत उनका चुलबुलापन, उनकी मुस्कुराहट उनका सँजना-सँवरना लड़कों को देखकर खिलखिलाना देखती हूँ   कोई और भी है…