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चौपाल

कविताः कारगिल विजय दिवस (श्रद्धांजली)

-प्रिया सिन्हा तू अटल रहे अडिग एवं अविचल रहे तेरे दिलों में भरा आत्म-विश्वास है रूके ना तू, झूके ना तू थके ना तू, पीछे हटे ना तू क्योंकि तू हिन्दुस्तानी व्यक्ति बहुत- बहुत ही…


कविताः बहुरूपिया 

-रचना दीक्षित सोचती हूँ माँ है बहुरूपिया या गिरगिट एक ही दिन में बदलती है असंख्य रूप रंग पर सब सार्थक लस्सी शरबत चाय में चीनी बन के घुलना रोटियों पर घी बन के पिघलना…


कविताः जाओ तुम फिर लौट आना

-सरिता अधूरी ख्वाइशें को पूरा करने कुछ अधूरे सपनों को पूरा करने जाओ तुम फिर लौट आना… उन अनजान पलों में तुम अपने बनकर मदमस्त हवाओं में खुशबू बनकर चलती सांसो की वजह बनकर जाओ…


मेले में पान बीड़ी की दुकान लगाए, कवि “लिखे जो खत तुझे”, मुझको याद किया जाएगा

-सुकृति गुप्ता  (महान कवि की यादों पर विशेष) “स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे। कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते…