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poem

कविताः बेटियां

– मीना भारद्वाज पेड़ों की डाल से टूट कर गिरे चन्द फूल‎ अलग नहीं हैं ब्याह के बाद की बेटियों से। आंगन तो है अपना ही पर तब तक ही जब तक साथ था डाल…


कविताः फ़िर कल

-बिकाश आनंद आंखें तरस रहीं, पलकें बरस रहीं, न जाने तन बदन में, ये कैसी हो रही हलचल ओह, फ़िर कल… रात न कटी, दिन जो है डटी , न जाने कब लौटेगा, ये बीत…


कविताः मां कहां हो तुम

-देवेश अग्रवाल मैंने कभी उसकी एक झलक नहीं देखी पर हर जगह उसका साया पाया है सुना है उसको सब मां कहते हैं कभी उसका चेहरा नहीं देख सका मैं पैदा हुआ तो सोचा भगवान…


कविताः फ्लाई ओवर (पुल)

-संजय भास्कर  फ्लाईओवर के बारे में कविता लिखना कोई आसान काम नहीं है। फ्लाईओवर के बारे में कविता लिखने से पहले शहर के लोगों के विचार जान लेने जरूरी हैं, जो हर रोज या अक्सर…