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कविता

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना : जिसने अपनी कविता में आम आदमी से किया वादा निभाया

हिंदी नई कविता के सबसे प्रखर किरदारों में से एक सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के साथ एक एसा संयोग जुड़ा है जैसा शायद हिंदी के किसी साहित्यकार के साथ नहीं है. वह पैदा भी हिंदी पखवाड़े…


पाश : जिसने हर युवा के सपनों को मरने से बचाया

सबसे ख़तरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना, तड़प का न होना सब कुछ सहन कर जाना घर से निकलना काम पर और काम से लौटकर घर आना सबसे ख़तरनाक होता है हमारे सपनों…


व्यस्तताओं के जाल में

अक्सर हो जाती हैं इकट्ठी ढेर सारी व्यस्तताएँ और आदमी फंस जाता है इन व्यस्तताओं के जाल में पर आदमी सोचता जरूर है कि छोड़ आएं व्यस्तताएं कोसों दूर अपने से पर जब हम निकलते…


सुनो न मां…

सुनो न माँ, सुनती क्यों नहीं, बस आज की बात है माँ, कल से पक्का जाऊंगी। कैसे-कैसे बहाने बना स्कूल से बचूं मैं, कैसे कहूं माँ, स्कूल से बचना मेरी शैतानी नहीं, मज़बूरी है मेरी।…