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कविता


हम सब का अभिमान तिरंगा

-जगदीश गुलिया मेरे देश की है ये शान तिरंगा। हम सब की है ये जान तिरंगा।।   यूँ ही सदा लहराता रहे ये, हम सब की पहचान तिरंगा। कितना सुन्दर कितना प्यारा, हम सब का…


कविताः अंत में तुम हम हो जाना 

–नीरज सिंह सुनो, मेरे तुम हम बन जाना अपने ग़ुलाबी होठों की लाली हो सके तो हमारे माथे पर छोड़ जाना अपने हाथों की उंगलियों को मेरे बालों में सहलाते-सहलाते कहीं खो जाने देना हो…


कविताः बेखबर से हम

-प्रिया सिन्हा बेखबर से हम हम कभी थोड़ा बेखबर रहते हैं तो कभी सबकी खबर रखते हैं कुछ इस तरह सबकी जानकारी हम तो शब-ओ-सहर रखते हैं   रहते तो हैं हम भी कभी ओझल,…