मैं सफ़र का था (कविता)
मैं कभी उत्तर तो कभी पूर्व हो चला ऐसा जीवन बनाया कि खानाबदोश हो चला पहाड़ों पर रात बिताई कितनी बंजर खेतों में कई बार पसर गया मैं सफ़र का था सफ़र में ही रह…
मैं कभी उत्तर तो कभी पूर्व हो चला ऐसा जीवन बनाया कि खानाबदोश हो चला पहाड़ों पर रात बिताई कितनी बंजर खेतों में कई बार पसर गया मैं सफ़र का था सफ़र में ही रह…
– संजय भास्कर जिंदगी तो एक मुसीबत है मुसीबत के सिवा कुछ भी नहीं पत्थरों तुम्हे क्यूं पूजूं तुमसे भी तो मिला कुछ भी नहीं रोया तो बहुत हूं आज तक अब भी…
-पूजा कुमारी सत्ता की रस्म हो चली है हर त्योहार पर उपहार त्योहार कैसा? उपहार कैसा? इज्जत लूटने का त्योहार हो तो लाख टके का उपहार जीवन जाने का त्योहर हो तो लाख टके…
-संजय भास्कर हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष और नामचीन कवि विष्णु खरे (78) का बुधवार को दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में निधन हो गया। बीते 12 सितंबर को ब्रेन हेमरेज के बाद उन्हें यहां भर्ती…