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चौपाल

शिक्षक दिवस विशेषः एक छात्रा की डायरी

-पूजा कुमारी “गुरु गोवन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो बताय ।।”  – कबीर कबीर का यह दोहा बहुत ही प्रसिद्ध एवं बहुश्रूत है। हम सभी बचपन से ही इसे पढ़ते,…


कृष्ण का जन्म हो गया, केक भी कट गया और जानिए क्या कुछ बदल गया

-प्रभात श्रीकृष्ण जी का जन्म हो गया रात के 12 बजे। दर्शक व भक्तगण झूमते नजर आ रहे थे। कुछ भक्तिरस में सराबोर होकर तो कुछ भांग रस में सराबोर होकर। पहले से काफी कुछ…


माखन चोर से जुड़ी वो खास बातें जो कृष्ण जन्माष्टमी को बनाती हैं विशेष

-नेहा पांडेय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी विशेष “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” स्कूल में इस तरह के नारे लगाते हुए हर बच्चा अपने आप को नन्द गोपाल जैसा महसूस करता है। कृष्ण हिन्दू धर्म के…


कविताः बिस्तर की सलवटें

-डॉ. संजय यादव “चारागर” यूँ तो निर्जीव हैं, मौन हैं ज़माने की नज़रों में शून्य हैं, गौण हैं पर हमारी इसी शून्यता के गर्भ में दफ़न हैं राज के गहरे समन्दर कई और ओढ़कर सो रहे हैं हमारी ख़ामोशी के कफ़न को चीख़ों के तूफ़ान कई हाँ, बिस्तर की सलवटें हैं हम बदल-बदल कर करवटें गुज़ारी जो तुमने उन रातों की मूकगवाह हैं हम हाँ, बिस्तर की सलवटे हैं हम   कभी पिया की यादें तो कभी अपनों की उलझने कभी आने वाले कल की बेचैनियाँ तो कभी ज़िंदगी की दुश्वारियाँ ना जाने किस-किस को पनाह दी है हमने सभी का मर्ज़ अपने सर पर लेकर हाकिम को ही दवा दी है हमने गिन-गिन तारे गुज़ारी आँखों में जो तुमने उन रातों की मूकगवाह हैं हम…