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चौपाल

वो देश (कविता)

-पवन कुमार देश वो जाने कहां है खो गया खून से अपना नाम वतन से धो गया था सुख वतन, उन्माद वतन अब हो गया देश वो जाने कहां है खो गया   जिंदगी में…


आज की नारी (कविता)

-प्रिया सिन्हा आज की नारी कहती – मुझे किसी के भी स्नेह भरी छाँव की जरूरत नहीं, अब अकेले ही इस कड़ी धूप में पिघलने दो मुझे सब करीबी लोगों का सानिध्य बहुत पा लिया,…


सत्ता स्वार्थी हो चली है (कविता)

-पूजा कुमारी सत्ता की रस्म हो चली है हर त्योहार पर उपहार त्योहार कैसा? उपहार कैसा?   इज्जत लूटने का त्योहार हो तो लाख टके का उपहार जीवन जाने का त्योहर हो तो लाख टके…


कुछ रिश्ते अनाम होते हैं (कविता)

– संजय भास्कर   कुछ रिश्ते अनाम होते हैं पर वो रिश्ते दिल के करीब होते हैं अनाम होने पर भी रिश्ते कायम रहते हैं पर, जब भी उन्हें नाम देने की कोशिश की जाती है…