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कविता

समझौतों की कोई जु़बान नहीं होती (कविता)

तल्‍लीन चेहरों का सच कभी पढ़कर देखना कितने ही घुमावदार रास्‍तों पर होता हुआ यह सरपट दौड़ता है मन हैरान रह जाती हूँ कई बार इस रफ्त़ार से अच्‍छा लगता है शांत दिखना पर कितना…


विश्व मानवाधिकार दिवस पर विशेष

आइए हम सभी मिलकर बातें करते हैं मानवाधिकार की, है तो ये बहुत ही साधारण सब बात पर है ना बेकार की   सबसे खास अधिकार रोटी, कपड़ा और मकान साथ ही साथ मिले सबको…


मौन संवाद का रिश्ता

बरसों से तेरे मेरे बीच नहीं है कोई वार्तालाप मगर बन गया है एक रिश्ता तेरे मेरे दरमियान मौन, मौन हाँ…मौन संवाद का जिसमें तुम कुछ कहती भी नहीं हो फिर भी सब मालूम हो…


कहाँ है सब्र?

सब्र चाहिए मुझे परेशां हूँ निकलता हूँ अपने डेरे से रोज उसके लिए कहाँ मिलेगा ये सब्र सब्र चाहिए मुझे मन अपने गति से भी अधिक ढूंढ़ता है उसे पूरी दुनिया देखता है मन पूरे…