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कविता

जसिंता केरकेट्टा की तीन कविताएं

1. प्रेम में ‘दो’ हो जाना   प्रेम में आदमी क्यों ‘एक’ हो जाना चाहता है? अपनी भिन्नता के साथ क्यों ‘दो’ नहीं रह पाता है?   इस ‘एक’ की चाहत में वह प्रेम को…

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हवा का झोंका

तुम कहाँ हो आकाश सूना हो उठा काले बादल दूर दिशाओं से उड़ते आ रहे अँधेरा रास्ते का मन के आँगन में बरस रहा पानी जंगल में झूमते पेड़ हिलोरे ले रहा सागर हर तरफ…


सदैव अपनी जड़ और जमीन से जुड़ करके ही हम रचनारत रहें- कवि रजत कृष्ण से बातचीत

छत्तीसगढ के कवि रजत कृष्ण की कविताओं में इस जनपद के लोक जनजीवन का सौंदर्य खास कर प्रकट हुआ है। प्रस्तुत है इनसे राजीव कुमार झा की बातचीत कविता लेखन की शुरुआत स्कूली शिक्षा के…


कवयित्री नलिनी पुरोहित की कविताएं और उनका साक्षात्कार

आज हम साहित्य जगत से नलिनी पुरोहित से रूबरू करा रहे हैं। नलिनी पुरोहित गुजरात की हिंदी कवयित्री हैं। काव्य लेखन के अलावा देश विदेश में हिंदी के प्रचार प्रसार का काम भी किया है।…