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कविता

वह सुबह कब यहाँ आयेगी ?

वह सुबह कब यहाँ आयेगी ? जब सूनी सड़कों पर बेटी हो निडर घूम – फिर पायेगी । वह सुबह कब यहाँ आयेगी ?   मुखौटा पुरुषों का पहनकर दानव वहशी बन डोल रहे लगती…

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देश के ताजा हालात पर एक प्रश्न- क्या लिखूँ?

सत्ता की दलाली या अंतर्रात्मा की आवाज़ लिखूँ? झूठ का साम्राज्य या सच का ख्वाब लिखूँ? क्या लिखूँ?   उन्नाव के किसानों का आर्द्र रूदन या बिचौलियों की सरकार लिखूँ? मजदूरों की कुदाल या पूँजीपतियों…


डर लगता है

इंसान को इंसान से डर लगता है आखिर ना जाने क्यों उसे दुनिया जहां से डर लगता है   चाहता तो है वो खुलकर ही करना बयां कड़वे सत्य को प्रत्येक अपनों से सदा पर…


मुझे पता है बिखराव के ये मौसम फिर से आयेंगे

हालात, वक़्त, यादों का ढेर, दुःख, उदासी से पुते हुए पन्ने और वो। इक शाम आई और चली गई रात से डरकर। “मैं कौन हूँ” सोचते हुए अरसा बीत गया और जब जवाब आने को…