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poem

कुछ कहा भी होता चुप होने से पहले

कुछ याद किए होते सब भूलने से पहले कुछ कहा भी होता, चुप होने से पहले   शायद मुझमें ही कुछ कमी थी जो याद ना आए तुम्हें कुछ तो वफ़ा किया होता, बे मुरव्वत…


तो माला प्यार की तोड़ देना, वक्त की मांग है

जब प्रयास विनम्रता के सारे असफल हो जाएं द्वार देवताओं के प्रार्थनाएं सारी अनसुनी हो जाएं तो बंधन मनुहार के तोड़ देना, वक़्त की मांग है निभाते रहे हम ही रीत सदा प्रीत की हारकर…


मेरी जिंदगी (कविता)

जितना ही मैं अपनी समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करती हूँ, उतना ही अत्यधिक उलझनों में मुझे उलझाती जा रही मेरी जिंदगी; चाहती तो हूँ मैं भी खूब हँसना-मुस्कुराना दिल से हर-दिन, हर-पल, मगर अब…


गलतियां जान कर, पर बन कर अनजाने करो

रिश्ता तोड़ना है तो कुछ बहाने करो   गलतियां जान कर पर बन कर अनजाने करो   बेमतलब की, बेवजहों की कुछ अफ़साने करो   रोज कहो मिलेंगे-मिलेंगे पर थोड़ा कम आने-जाने करो   मत…