कविताः बेखबर से हम
-प्रिया सिन्हा बेखबर से हम हम कभी थोड़ा बेखबर रहते हैं तो कभी सबकी खबर रखते हैं कुछ इस तरह सबकी जानकारी हम तो शब-ओ-सहर रखते हैं रहते तो हैं हम भी कभी ओझल,…
-प्रिया सिन्हा बेखबर से हम हम कभी थोड़ा बेखबर रहते हैं तो कभी सबकी खबर रखते हैं कुछ इस तरह सबकी जानकारी हम तो शब-ओ-सहर रखते हैं रहते तो हैं हम भी कभी ओझल,…
– संजय भास्कर अक्सर जब कभी मिल जाती है पुरानी डायरी तब लगभग हर उस शख्स के चेहरे पर मुस्कराहट आ जाती है जिन्होंने कभी इस डायरी में कुछ सपने संजोये होंगे डायरी में…
-रीना मौर्या सुख- दुःख में जो साथ दे परायों में अपनों का अहसास दे जिससे जुड़ा न हो कोई मज़बूरी का रिश्ता जिसे दिल ने माना है अपना ही हिस्सा वो प्यारा सा अहसास है…
-राधिका रमण रानी क्या यही है ईश्वर की इच्छा कोई मेरे तन में काँटे चुभाए क्या यही है ईश्वर की इच्छा कोई मेरे तन-मन को छलनी कर आत्मा को मार दे क्या यही है ईश्वर…