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कविता

क्या हारना इतना आसान है?

क्या हारना इतना आसान है? कि उस पर आंसू न निकले आगे बढ़ने का प्रयास तक न करें   क्या हमारी असफलता में सिर्फ हमारा दोष होता है? चाह कर भी कुछ ना कर पाने…


लेखनी चलती रहेगी, लेखनी चलती रहेगी!

गद्य निकले हैं कई, निकले न जाने पद्य कितने नोक से हैं शब्द निकले व्योम में नक्षत्र जितने ऊर्जा उपजी विचारों से उतर इसमें समाई तब अंधेरों में क़लम बिखरा सकी उज्जवल रुनाई मृदुल मन…


हां मैं पत्थर हूं

हाँ मैं पत्थर हूं, जिसे पैरों से मारा गया, नेताजी की गाड़ी पर फेंका गया लोकतंत्र पर हमला हूं, मैं ही सेना पर फेंका गया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हूं, हाँ मैं पत्थर हूं। मंदिर में…


आप जो ख़्वाबों में आए न होते

आप जो ख़्वाबों में आए न होते बेवज़ह हम मुस्कुराए न होते न फूल खिलते न कलियां मुस्कुरातीं भंवरे यूं गुनगुनाए न होते। आप जो ख़्वाबों में आए न होते   मौसम भी कुछ, ख़ास…