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कविता

मैं अधूरे प्यार से पूरी हुई हूँ

मैं रही राधा..रही मीरा, रही सीता रुक्मणी भी, उर्मिला भी मैं, अहिल्या भी रही हूँ युग रहा कोई, कहानी जो रही हो मैं अधूरे प्यार से पूरी हुई हूँ!   मैं उपेक्षित उर्मिला सी हूँ…


व्यस्तताओं के जाल में

अक्सर हो जाती हैं इकट्ठी ढेर सारी व्यस्तताएँ और आदमी फंस जाता है इन व्यस्तताओं के जाल में पर आदमी सोचता जरूर है कि छोड़ आएं व्यस्तताएं कोसों दूर अपने से पर जब हम निकलते…


मेरा भारत

शत-शत बार सदा भारत माँ के चरणों में वंदन है हिमा दास है बेटी और इसका बेटा अभिनंदन है   कश्मीर से धनुषकोटि फैली इसकी हरियाली है इसकी वह डल झील हमें गंगा जमुना सी…


कब तक न्यायालय में पीड़ितों के रूह नोचे जाएंगे

फिर एक सवाल उठा है दिल के किसी कोने में फिर आंखों से आंसू छलका है चुपके-चुपके रोने में   कब तक भरी सभा मे पांचाली के केश दबोचे जाएंगे कब तक न्यायालय में पीड़ितों…