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कविता

दाना मांझी और शिव

वह आय़ा भग्न हृदय से शव को कंधे पर चुपचाप उठाया, दुत्कार दिया गया वह अस्पताल के द्वार से एक एंबुलेंस की खातिर क्योंकि नहीं था, उसके जेब में एक भी पैसा मरी थी उसकी…


सफेद संगमरमर में ढला ताज

यमुना नदी के किनारे नीले पानी के साथ बना है ऐतिहासिक ताजमहल कहते हैं वो निशानी है किसी के प्यार मोहब्बत की शायद इसीलिए कई वर्षों से खड़ा होकर ताकता रहता है मोहब्बत करने वालों को…


…इश्‍क़ की किताबों में (कविता)

किसी सफ़े पे थी खिलखिलाती याद उसकी किसी सफ़े पे था उसकी मुस्‍कराहटों का पहरा इश्‍क़ की किताबों में करवटें बदलती रूहों का जागना उंगलियों के पोरों की छुँअन से फिर कहना उनका हौले-हौले से…


कुछ कहा भी होता चुप होने से पहले

कुछ याद किए होते सब भूलने से पहले कुछ कहा भी होता, चुप होने से पहले   शायद मुझमें ही कुछ कमी थी जो याद ना आए तुम्हें कुछ तो वफ़ा किया होता, बे मुरव्वत…