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कविता

झूठ कहते हैं लोग कि वक़्त के साथ हर जख्म भर जाते हैं

मुस्कुराये थे जिन पलों में तेरे साथ वो पल आज भी रुलाते हैं झूठ कहते हैं लोग कि वक़्त के साथ हर जख्म भर जाते हैं वो रूठना वो मनाना वो हँसना वो गाना मुझे…


जब मेहनतकश आएंगे

जग में फैलाई है, गंदगी चंद घरानों ने। सवर्ण, मंत्री-संत्री, राजा-महाराजा, और हुक्मरानों ने।   की है मेहनत, मेहतर, मजदूरों, और किसानों ने। की सफाई, दुनिया बनाई, फसल उगाई।   कलम नहीं, झाड़ू थमाई। मेहनत…


क्या हारना इतना आसान है?

क्या हारना इतना आसान है? कि उस पर आंसू न निकले आगे बढ़ने का प्रयास तक न करें   क्या हमारी असफलता में सिर्फ हमारा दोष होता है? चाह कर भी कुछ ना कर पाने…


लेखनी चलती रहेगी, लेखनी चलती रहेगी!

गद्य निकले हैं कई, निकले न जाने पद्य कितने नोक से हैं शब्द निकले व्योम में नक्षत्र जितने ऊर्जा उपजी विचारों से उतर इसमें समाई तब अंधेरों में क़लम बिखरा सकी उज्जवल रुनाई मृदुल मन…