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kavita

मुसीबत के सिवा कुछ भी नहीं (कविता)

– संजय भास्कर  जिंदगी तो एक मुसीबत है मुसीबत के सिवा कुछ भी नहीं   पत्थरों तुम्हे क्यूं पूजूं तुमसे भी तो मिला कुछ भी नहीं   रोया तो बहुत हूं आज तक अब भी…


आज की नारी (कविता)

-प्रिया सिन्हा आज की नारी कहती – मुझे किसी के भी स्नेह भरी छाँव की जरूरत नहीं, अब अकेले ही इस कड़ी धूप में पिघलने दो मुझे सब करीबी लोगों का सानिध्य बहुत पा लिया,…


कविताः अंत में तुम हम हो जाना 

–नीरज सिंह सुनो, मेरे तुम हम बन जाना अपने ग़ुलाबी होठों की लाली हो सके तो हमारे माथे पर छोड़ जाना अपने हाथों की उंगलियों को मेरे बालों में सहलाते-सहलाते कहीं खो जाने देना हो…