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डीयूः कॉलेजों को नहीं मिली दाखिले की फीस, विश्वविद्यालय ही कमा रहा इस पैसे से ब्याज

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) द्वारा दाखिले के दौरान ली गई फीस अब तक अपने पास रखे जाने को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस पैसे का ब्याज विश्वविद्यालय प्रशासन को क्यों मिल रहा है?

कॉलेजों को दाखिला फीस समय पर न लौटाए जाने का आरोप लगाते हुए डीयू विद्वत परिषद के सदस्य प्रो. हंसराज सुमन ने बताया कि डीयू से सम्बद्ध लगभग 80 कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में प्रत्येक शैक्षिक सत्र में 65 से 70 हजार छात्रों के दाखिले होते हैं। पिछले कुछ वर्षों से प्रवेश की प्रक्रिया डीयू ने अपने हाथों में ले रखी है। छात्रों की दाखिला फीस ऑनलाइन पोर्टल के जरिये ली जाती है। ऐसे में फीस लेने व फीस रिफंड का सारा कार्य अब डीयू प्रशासन के द्वारा होता है। लेकिन विवि फीस कॉलेजों को न लौटाकर उससे कमाई कर रहा है।

दाखिला राशि का ब्याज विश्वविद्यालय को  
बता दें कि कॉलेज में छात्रों की प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद कॉलेजों में 6 महीने या उसके ज्यादा समय के बाद दाखिले फीस की रकम कॉलेजों को भेजी जाती है। इस बीच प्रत्येक कॉलेज की दाखिले राशि का ब्याज कॉलेज को न मिलकर सीधे विश्वविद्यालय को मिलता है।

बता दें कि दाखिला लेते समय छात्रों से सोशल फंक्शन एंड क्लचरल आर्ट, यूनियन फीस, वर्ल्ड यूनिवर्सिटी सर्विस, स्टूडेंट्स वेलफेयर फंड, गेम्स एंड स्पोर्ट्स फंड, एनसीसी, एनएसएस, एनुअल डे, एकेडेमिक एंड सीए सोसायटी, कॉलेज वेलफेयर फंड, एसजी चार्जिंज, साइंस स्टूडेंट्स एक्टिविटीज, डिपार्टमेंटल स्टूडेंट्स एक्टिविटीज, कंप्यूटर फी, कॉलेज मेंटेनेंस फीस, ऑटोमेशन फीस आदि प्रति वर्ष ली जाती है।

कॉलेजों को जल्द फीस लौटाने को लेकर लिखा पत्र

हंसराज सुमन ने कहा कि कॉलेजों को सीधे दाखिला फीस दिए जाने के मामला विद्वत परिषद की बैठक में भी कई बार उठ चुका है। उन्होंने कॉलेजों को सीधे दाखिला फीस जमा करने का आदेश दिए जाने को लेकर डीयू के कुलपति को इस संदर्भ में पत्र लिखकर मांग की है कि डीयू के पास जमा कॉलेजों की दाखिला फीस को जल्द से जल्द दिलाई जाए ताकि जिस मद में वह पैसा खर्च किया जाना है कॉलेज समय पर तय कर ले।

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Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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