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चौपाल

स्त्री चिंतन और हिंदी साहित्यः वह समय कब आएगा जब स्त्रियां अपने देह की स्वयं मालिक होंगी?

यह सृष्टि केवल और केवल प्रकृति के कारण ही साश्वत है। हम आप तो जानते ही हैं कि इस प्रकृति में स्त्री समाहित है। स्त्री की अस्थि और मज्जा से ही हमारा अर्थात् पुरुष का…


हां मैं पत्थर हूं

हाँ मैं पत्थर हूं, जिसे पैरों से मारा गया, नेताजी की गाड़ी पर फेंका गया लोकतंत्र पर हमला हूं, मैं ही सेना पर फेंका गया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हूं, हाँ मैं पत्थर हूं। मंदिर में…


आप जो ख़्वाबों में आए न होते

आप जो ख़्वाबों में आए न होते बेवज़ह हम मुस्कुराए न होते न फूल खिलते न कलियां मुस्कुरातीं भंवरे यूं गुनगुनाए न होते। आप जो ख़्वाबों में आए न होते   मौसम भी कुछ, ख़ास…


खुलकर हँसना मुश्किल है

खुलकर हँसना मुश्किल है दिल भी किसी का दुखता है हम तो हँसते रहते हैं पर ग़म किसी का जी उठता है   कहते-कहते कभी जब हम अचानक से चुप जाते हैं चलते-चलते राहों में…