अमृता प्रीतम के 100 सालः वो कविताएं जो हर प्रेमी-प्रेमिका के दिलों में बसती हैं
तुम मिले तो कई जन्म मेरी नब्ज़ में धड़के तो मेरी साँसों ने तुम्हारी साँसों का घूँट पिया तब मस्तक में कई काल पलट गए- एक गुफा हुआ करती थी जहाँ मैं थी और एक…
तुम मिले तो कई जन्म मेरी नब्ज़ में धड़के तो मेरी साँसों ने तुम्हारी साँसों का घूँट पिया तब मस्तक में कई काल पलट गए- एक गुफा हुआ करती थी जहाँ मैं थी और एक…
चांदनी रात में सागर किनारे उल्टी पड़ी नाव पर दो प्राणी बैठे थे। एक गंभीर और दूसरा कुछ अनमना सा। अनमने अधीर ने यौवन में ही चढ़ आए अपने मोटापे को थोड़ा संभालते हुए कहा,…
अक्सर हो जाती हैं इकट्ठी ढेर सारी व्यस्तताएँ और आदमी फंस जाता है इन व्यस्तताओं के जाल में पर आदमी सोचता जरूर है कि छोड़ आएं व्यस्तताएं कोसों दूर अपने से पर जब हम निकलते…
टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी अन्तर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं गीत नया गाता हूं -अटल बिहारी वाजपेयी कई…