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पहलवानों के आंदोलन को लेकर अब तक क्या-क्या हुआ? क्या अब आंदोलन कमजोर हो गया है?

पहलवानों के आंदोलन को लेकर एक तरफ तमाम अफवाहों का बाजार गर्म है। वहीं दूसरी ओर आंदोलन को लेकर अब जो स्थिति साफ होते नजर आ रही है उनमें से दो ही बातें स्पष्ट हो पाई हैं।  एक, राकेश टिकैत का बयान जिसमें उन्होंने दोबारा 9 जून को जंतर-मंतर पर जाकर धरने शुरू करवाने वाले कार्यक्रम को स्थगित करने की बात कही। दूसरा गुरनाम सिंह चढूनी का अगवाई में 4 जून को सोनीपत की महापंचायत में बजरंग पुनिया का ऐलान जिसमें उन्होंने महापंचायत में कोई खास निर्णय न लेने की बात कही और साथ ही यह भी कहा कि पहलवानों को लेकर साझा महापंचायत आने वाले दिनों में होगी जिसमें आंदोलन को लेकर कोई बड़ा ऐलान किया जाएगा। इसके अलावा अब पहलवान भी रेलवे में अपनी नौकरी में दोबारा लौट चुके हैं। नौकरी पर दोबारा लौटने के फैसले के पीछे अमित शाह की मुलाकात को इससे जोड़ कर देखा जा रहा है। इसके बाद अफवाहों के बाजार गर्म होने लगे और सवाल उठने लगे कि आखिर क्या अब पहलवानों ने सरकार से बातचीत की वजह से आंदोलन स्थगित कर दिया? मीडिया में आंदोलन खत्म करने की बातें भी चलने लगी इसके बाद पहलवानों में साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया को सोशल मीडिया पर आकर मीडिया में चल रही भ्रामक खबरों का खंडन किया और कहा कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। इसकी रणनीति पर विचार चल रहा है। नौकरी पर दोबारा से जाने का मतलब यह नहीं कि आंदोलन खत्म हो गया। कुछ लोग और मीडिया इस तरह की फेक खबरे चला रहे हैं। अगर जरूरत होगी तो हम अपनी न्याय की लड़ाई के लिए नौकरी भी छोड़ देंगे।  

साथ ही अखबार, टेलीविजन और पोर्टल पर नाबालिग पहलवान की ओर से केस वापस लेने की खबरों का भी पहलवानों ने खंडन किया और कहा कि किसी पहलवान ने कोई केस वापिस नहीं लिया। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस जैसे तमाम मीडिया की खबरों में नाबालिग लड़की के धारा 164 के तहत दोबारा कोर्ट में बदलकर बयान देने औऱ केस वापसी की खबर प्रसारित किए जा रहे हैं। इसलिए अभी भी नाबालिग के बयान को लेकर रहस्य की स्थिति बनी हुई है। अगर नाबालिग ने अपना बयान बदला है तो हो सकता है कि पॉक्सों एक्ट के अंतर्गत दर्ज हुई एफआईआर कमजोर हो जाए। और यौन शोषण के आरोपी बृजभूषण की गिरफ्तारी न हो पाए।  

क्या आंदोलन कमजोर हो गया है?

राकेश टिकैत ने कहा कि पहलवानों ने गृहमंत्री से मुलाकात की है। महिला पहलवान नौकरी पर लौट रही हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आंदोलन समाप्त हो गया है। 2 जून को कुरुक्षेत्र में सर्व खाप पंचायत के दौरान बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी न होने पर राकेश टिकैत ने जंतर मंतर पर पहलवानों को ले जाकर फिर से धरना शुरू कराने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि 9 जून तक अगर उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे पहलवानों को धरने पर वापस जंतर मंतर छोड़कर आएंगे और देशभर में पंचायत करेंगे। लेकिन क्योंकि सरकार ने 9 जून से पहले बातचीत शुरू कर दी है इसलिए जंतर मंतर जाने वाला कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है।

23 अप्रैल से बीजेपी सांसद और कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी को लेकर जंतर मंतर पर धरने पर बैठे पहलवानों को 1 महीने से अधिक हो चुके थे। इन दिनों पहलवानों को किसानों, जवानों और विपक्ष का खूब समर्थन मिला पर सरकार की तरफ से कोई भी कर्यवाही नही हुई। पहलवानों और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण के बीच का विवाद तो तब बढ़ा, जब 28 मई को नये संसद भवन के उद्घाटन समारोह के दिन पहलवानों को संसद भवन की तरफ कूच करने से रोका गया और पहलवानों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। और जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन को दिल्ली पुलिस ने समाप्त करा दिया। दोबारा जंतर मंतर पर पहलवानों को प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी गई। बता दें कि जंतर मंतर पर पहलवानों के धरने को 35 दिन होने के बाद 28 मई को खाप और किसान संगठनों की ओर से नई संसद के सामने महिला महापंचायत की घोषणा हुई थी।

दिल्ली पुलिस की ओर से पहलवानों को हिरासत में लिए जाने के तौर तरीकों पर सवाल उठने लगे औऱ इस विवाद के बाद लोगो मे रोष और बढ़ गया। 28 मई के अगले दिन ही पहलवानों ने अपने मेडल को हरिद्वार में गंगा नदी में प्रवाहित करने का फैसला लिया, हालांकि किसान नेता नरेश टिकैत ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। और मेडल को पहलवानों से लेकर इसे राष्ट्रपति को सौंपने की बात कही। इसके बाद पहलवानों ने नरेश टिकैत और अन्य खाप किसान संगठनों को आंदोलन को लेकर फैसले देने के लिए 5 दिन का वक्त दिया। इसके बाद महापंचायतों का दौर शुरू हुआ। नरेश टिकैत और खाप की पंचायत मुजफ्फरनगर के सोरम में हुई जहां फैसले को सुरक्षित रख लिया गया। अगले दिन कुरुक्षेत्र में महापंचायत रखी गई जिसमें 9 जून को जंतर मंतर जाकर पहलवानों के प्रदर्शन को दोबारा शुरू कराये जाने की बात कही गई। वहीं 4 जून को किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी और राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी, पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक और भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद रावण की अगवाई में महापंचायत बुलाई गई। इसदिन पहलवानों के आंदोलन को लेकर लोगों को किसी ठोस निर्णय के ऐलान का इंतजार था लेकिन पहलवान बजरंग पुनिया ने किसी ठोस निर्णय न लेने की बात कही और कहा कि अगली महापंचायत पहलवानों की ओर से बुलाई जाएगी जिसमें ठोस निर्णय लिए जाएंगे। और इसके लिए जो भी फैसला होगा उसकी घोषणा अगले 3-4 दिनों में कर दी जाएगी। फिलहाल खबर लिखे जाने तक पहलवानों की ओर से महापंचायत की तिथि को लेकर कोई ऐलान नहीं हुआ है।

उधर आरोपी बृजभूषण शरण सिंह ने 5 जून को अयोध्या में महारैली बुलाई थी जिसमें संत भाग लेने वाले थे। इस रैली में बृजभूषण का दावा था कि 11 लाख लोगों के आने की संभावना है। इसे रद कर दिया गया। इस बात की जानकारी उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट लिख कर की थी। अदालत के चल रहे मामले को लेकर और उसके सम्मान में यह रैली रद की गई। ऐसा बृजभूषण के फेसबुक पोस्ट में दावा था। वहीं यूपी सरकार ने रैली खारिज होने पर धारा 144 लगे होने की बात कही। इसके बाद मीडिया में यह भी खबर आई कि बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह को भारतीय जनता पार्टी ने किसी भी तरह की बयानबाजी करने से मना किया है। पार्टी ने सांसद को सख्त मना किया है कि वह किसी भी मुद्दे पर कोई आक्रामक बयान न दें।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात के बाद भारतीय पहलवान साक्षी मलिक रेलवे में अपनी नौकरी पर वापस लौट गई हैं। और वही दूसरी तरफ राकेश टिकैत ने पहलवानों के समर्थन में 9 जून को जंतर मंतर पर प्रस्तावित धरना स्थगित कर दिया है। राकेश टिकैत ने कहा कि पहलवानों ने गृहमंत्री से मुलाकात की है। यह बेहतर है। महिला पहलवान नौकरी पर लौट रही हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आंदोलन समाप्त हो गया है।

मीडिया में पीड़िता के बालिग होने की खबरों की चर्चा और पहलवान साक्षी और बजरंग को लेकर ख़बर चलाई गयी थी जिसमें कहा गया कि पहलवानों ने अपना प्रदर्शन से नाम वापस ले लिया। साथ ही मीडिया में यह दावा किया गया कि नाबालिग लड़की ने अपना केस वापिस ले लिया औऱ दोबारा जाकर अपना बयान दर्ज कराया है। इसके बाद पहलवानों ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर इन खबरों का खंडन किया औऱ कहा कि ये फर्जी खबरें मीडिया की ओर से जानबूझकर फैलाई जा रही है।

पहलवानों का मामला क्या है?

इस मामले की शुरुआत होती है जनवरी 2023 में जब पहलवान विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक ने दिल्ली के जंतर मंतर प्रदर्शन स्थल पर कई गंभीर आरोप लगाए थे , ब्रजभूषण सिंह के खिलाफ पहलवानों ने प्रमुख तौर पर यौन शोषण, तानाशाही-मनमानी, अपशब्दों का प्रयोग, मानसिक प्रताड़ना, आवाज उठाने पर धमकाने, जैसे पांच आरोप लगाए थे। जिसके बाद केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने पहलवानों से मुलाकात की और 23 जनवरी को आरोपों की जाँच करने के लिए एक 5 सदस्यों की समिति बनाई थी। इस समिति का अध्यक्ष दिग्गज मुक्केबाज एमसी मेरीकॉम को चुना गया था। इस समिति को 4 हफ़्तों के अंदर जाँच पूरी करनी थी । हालांकि इस समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को दे दी है, लेकिन रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है ।  महिला पहलवानों का कहना है कि 21 अप्रैल को कनॉट प्लेस थाने में बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ शिकायत करने गए थे, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की थी। इसलिए 23 अप्रैल को दूसरी बार ओलंपिक पदक विजेता पहलवान बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट की अगुवाई में पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ धरना प्रदर्शन करना शुरू किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बीजेपी सांसद के खिलाफ एफआईआऱ दर्ज की गई।

इस धरने की अगुवाई कर रहीं विनेश फोगाट ने बृजभूषण पर लगाए गए आरोप के तहत कहा था कि अध्यक्ष ज्यादातर उसी होटल में कमरा बुक कराते थे, जहां महिला खिलाड़ी ठहरती थी। साथ ही उन्होंने खिलाड़ियों को हत्या करने की धमकी देने का आरोप भी अध्यक्ष के नजदीकी लोगों पर लगाया, लेकिन विनेश ने किसी का भी नाम लेने से इनकार करते हुए कहा कि अगर जरूरत  पड़ी, तो वह सही समय पर नामों का भी खुलासा करने से नहीं हिचकिचाएंगी। वहीं, बजरंग पूनिया ने भी भूषण पर तानाशाही रवैये का आरोप लगाते हुए कहा था  कि उन्होंने खिलाड़ियों को छोटी-छोटी चीजों के लिए तरसा कर रख दिया। साथ ही, पूनिया ने अध्यक्ष पर किसी भी समय खिलाड़ियों का ट्रॉयल कराने बात कही।

एफआईआऱ में क्या आरोप हैं?

21 अप्रैल को कनॉट प्लेस थाने में 7 पहलवानों की ओर से बृजभूषण के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। इन शिकायतों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 28 अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण के खिलाफ यौन उत्पीड़न के दो मामले दर्ज किए हैं। पहली प्राथमिकी नाबालिग की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर है। इसमें पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं, दूसरी एफआईआर अन्य पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से संबंधित है। यौन शोषण की ये कथित घटनाएं 2012 से 2022 के बीच हुईं। एफआईआऱ में धारा- 354 (महिला का शीलभंग भंग करने के इरादे से उस पर हमला या बल प्रयोग), 354A (यौन उत्पीड़न), 354D (पीछा करना) और 34 (सामान्य इरादा) है। इनके तहत एक से तीन साल की जेल की सजा हो सकती है। दूसरी एफआईआर में POCSO एक्ट भी लगाया गया है। इसमें पांच से सात साल जेल की सजा का प्रावधान है।

नाबालिग ने क्या आरोप लगाए?

फोटो खिंचवाने के बहाने कसकर पकड़ा और जानबूझकर सीने तक हाथ फेरा।

पहली पहलवान के आरोप- होटल के रेस्तरां में रात के खाने के दौरान मुझे अपनी मेज पर बुलाया, मुझे टच किया, छाती से पेट तक छुआ। रेसलिंग फेडरेशन के ऑफिस में बिना मेरी इजाजत के मेरे घुटनों, मेरे कंधों और हथेली को छुआ गया। अपने पैर से मेरे पैर को भी टच किया गया। मेरी सांसों के पैटर्न को समझने के बहाने से छाती से पेट तक टच किया गया।

दूसरी पहलवान के आरोप – जब मैं चटाई पर लेटी हुई थी, आरोपी (बृजभूषण सिंह) मेरे पास आया, मेरे कोच उस वक्त नहीं थे, मेरी अनुमति के बिना मेरी टी-शर्ट खींची, अपना हाथ मेरे ऊपर रख दिया छाती पर और मेरी श्वास की जांच के बहाने इसे मेरे पेट के नीचे सरका दिया। फेडरेशन के ऑफिस में मैं अपने भाई के साथ थी, मुझे बुलाया और भाई को रुकने को कहा गया, फिर कमरे में अपनी तरफ खींचा जबरदस्ती करने की कोशिश की।

तीसरी पहलवान के आरोप – उसने मुझे मेरे माता-पिता से फोन पर बात करने के लिए कहा, क्योंकि उस समय मेरे पास मेरा मोबाइल फोन नहीं था । आरोपी (सिंह) ने मुझे अपने बिस्तर की ओर बुलाया जहां वह बैठा था और फिर अचानक, मेरी अनुमति के बिना उसने मुझे गले लगा लिया। अपने यौन इरादों को पूरा करने के लिए, उसने मुझे सप्लीमेंट खरीदने की पेशकश करके मुझे रिश्वत देने की भी कोशिश की।

चौथी पहलवान के आरोप – बृजभूषण सिंह ने मुझे बुलाया और मेरी टी-शर्ट खींची और अपना हाथ मेरे पेट के नीचे खिसका दिया। मेरी सांस की जांच के बहाने मेरी नाभि पर हाथ रख दिया।

पांचवी पहलवान के आरोप- मैं लाइन में सबसे पीछे थी, तभी गलत तरीके से छुआ, मैने जब दूर जाने की कोशिश की तो कंधे को पकड़ लिया।

छठी पहलवान के आरोप- तस्वीर के बहाने कंधे पर हाथ रखा, मैने विरोध किया।

जनवरी से लेकर अब तक क्या क्या हुआ?

18 जनवरी 2023 को ये पहली बार यह विवाद सामने आया था। विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक समेत कई दिग्गज पहलवान जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए थे। उस दिन की शाम 4 बजे कुश्ती खिलाड़ियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे । उस वक्त पहलवानों के इस आंदोलन ने काफी सुर्खियां बटोरी और केंद्र सरकार ने इन शिकायतों पर कार्रवाई का भरोसा भी दिया था । इस मामले की जांच के लिए समिति भी बनाई पर फिर भी बृजभूषण पर कोई कर्यवाही नही हुई।

महिला पहलवानों ने बताया कि उन्होंने 21 अप्रैल को इस संबंध में दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में शिकायत दी थी लेकिन उन्होंने जब 22 अप्रैल को शिकायत की स्थिति जानी तो उन्हें बताया गया कि एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। फिर उन्होंने ने 23 अप्रैल को दोबारा से दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देना शुरू किया।

जंतर -मंतर पर धरने पर बैठे पहलवानों ने पुलिस पर भी आरोप लगाए थे। पहलवान विनेश फोगाट ने कहा था कि पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की की थी। उन्होंने कहा, धरने पर उनके पास खाना-पानी नहीं आने दिया जा रहा था। बिजली काटी जा रही थी।

3 मई की घटना : पुलिस और पहलवानों की झड़प

दिल्ली के जंत- मंतर पर 3 मई की रात जमकर हंगामा हुआ, प्रदर्शन कर रहे पहलवानों ने पुलिस पर मारपीट का आरोप भी लगाया था। वहीं एक पहलवान के घायल होने की भी सूचना थी। घटना के बाद पहलवानों के समर्थन में पहुंचे आप के मंत्री सौरभ भारद्वाज, दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल और विधायक कुलदीप समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया गया था।

हंगामे की शुरुआत तब हुई जब पहलवानों के जंतर-मंतर पर चल रहे धरने में पहलवान फोल्डिंग बेड लेकर पहुंचे। दिल्ली पुलिस ने बेड को प्रदर्शन स्थल पर ले जाने से रोका। इसके बाद पहलवानों और पुलिस के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। आपस में मारपीट की भी खबरें आई औऱ इसमें पहलवानों के भी घायल होने की खबरें आई। दिल्ली पुलिस ने उस रात में मीडिया और लोगों को जंतर मंतर जाने से रोका। पुलिस के आंदोलन को रोकने के आरोप के बाद पहलवानों को दूसरे दिन से ही तमाम राजनीतिक दलों के साथ – साथ लोगों का समर्थन मिलना शुरू हो गया।

28 मई की घटना – जब जंतर मंतर पर चल रहा प्रदर्शन खत्म हुआ

28 मई को नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह के दिन पहलवानों को संसद भवन की तरफ कूच करने से रोका गया फिर पहलवानों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। और उसी दिन दिल्ली पुलिस द्वारा पहलवानों का धरना भी खत्म कर दिया गया था और जंतर-मंतर से उनका सामान भी हटा दिया गया था। इसके बाद पुलिस की तरफ से कहा गया था कि अगर पहलवान जंतर मंतर के अलावा किसी उचित जगह पर प्रदर्शन की अनुमति मांगते हैं तो उन्हें धरना देने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि शाम तक सभी महिला पहलवान और रात तक पुरुष पहलवानों को छोड़ दिया गया था।

29 मई की घटना –  खत लिखकर मेडल गंगा में बहाने और इंडिया गेट पर प्रदर्शन की पहलवानों की बात पर क्या हुआ?

पुलिस ने 28 मई को पहलवानों और उनके समर्थकों के खिलाफ नई संसद की ओर कूच करने को लेकर कई एफआईआर दर्ज की। इसमें पहलवानों और प्रदर्शनकारियों पर दंगा भड़काने, ग़ैरक़ानूनी जमावड़ा करने, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने, सरकारी कर्मचारी के आदेश का उल्लंघन करने, सरकारी कर्मचारी को चोट पहुंचाने और सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए आपराधिक बल का इस्तेमाल करने जैसे आरोप लगाए गए हैं । 28 मई की घटना से आहत हो कर पहलवानों ने हरिद्वार जाकर गंगा में मेडल बहाने का फैसला लिया, हालांकि किसान नेता नरेश टिकैत ने हरिद्वार पहुंच कर उन्हें ऐसा करने से रोक दिया था और उनसे 5 दिन का वक्त मांगा। मेडल गंगा में बहाने से पहले पहलवानों ने अपने अपने ट्विटर हैंडल से एक खत शेयर किया, जिसमें 28 मई को दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाये थे। साथ ही हताश होकर मेडल गंगा में प्रवाहित कर इंडिया गेट पर जाकर बैठने की बात कही थी।

इसके बाद ही किसानों और खाप की महापंचायते शुरू हुईं। इसके बाद बृजभूषण शरण सिंह ने 5 जून की अपनी रैली रद की। साथ ही पहलवानों की गृहमंत्री अमित शाह के साथ मुलाकात हुई। हालांकि इस मुलाकात में बृजभूषण की गिरफ्तारी पर अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।

इस बीच 6 जून को ही दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के सिलसिले में उनके सहयोगियों और यूपी के गोंडा में उनके आवास पर काम करने वाले लोगों के बयान दर्ज किए हैं।

अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिस लड़की के बयान के आधार पर बृजभूषण के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज हुआ था, अब सीआरपीसी की धारा 164 के तहत एक बार फिर उसका बयान दर्ज किया गया है। खबरों के अनासर अधिकारियों ने बताया है कि पुलिस मामले में साक्ष्य इकट्ठा कर रही है। इसके बाद अदालत में रिपोर्ट पेश करेगी।

पहलवानों के समर्थन में भारी जनसैलाब

पहलवानों के साथ जुड़ने वाले लोगों की संख्या और बढ़ गयी है जंतर मंतर तक सीमित आंदोलन को देश के कोने कोने में हुई विरोध प्रदर्शन और महापंचायतों में भीड़ से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। बॉलीवुड में तमाम अभिनेता अभिनेत्रियों के समर्थन के बाद इसी श्रृंखला में 1983 में वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम के कई सदस्य पहलवानों के समर्थन मे सामने आए। इनमें कपिल देव, सुनील गावस्कर, दिलीप वेंगसरकर और मदनलाल समेत कई दिग्गज क्रिकेटर्स शामिल हैं। विदेश में बसे भारतीय भी हरियाणा की महिला पहलवानों के समर्थन में खड़े हो गए हैं। ऑस्ट्रेलिया में विक्टोरिया प्रांत की मेलबर्न स्थित असेंबली के बाहर भारतीय मूल के लोगों ने महिला पहलवानों को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन किया। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कोलकाता की सड़कों पर उतर कर पहलवानों के प्रदर्शन का समर्थन किया । दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक , प्रियंका गाँधी, भीम आर्मी चीफ -चंद्र शेखर रावण , जयंत चौधरी, किसान नेता राकेश टिकैत ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा, सोनू सूद, वीरेंद्र सहवाग,  स्वरा भास्कर, अभिनव बिंद्रा, सानिया मिर्ज़ा,जैसे कई जानी मानी हस्तियों ने पहलवानों को लेकर जंतर मंतर जाकर औऱ सोशल मीडिया पर अपना समर्थन दिखाया है।

क्या मीडिया फर्जी खबरें चला रही है?

इन सारे मुद्दों के बीच फेक खबरों का सुर्खियों मे होना एक आम सी बात हो गयी है। ऐसा ही कुछ हुआ 5 जून को जब एक जानी मानी मीडिया चैनल ने पहलवान साक्षी और बजरंग को लेकर ख़बर चलाई कि पहलवानों ने अपना प्रदर्शन से नाम वापस लेने के बाद रेलवे की नौकरी ज्वाइन की। माना जा रहा है कि ये खबर एएनआई के उस ट्वीट के बाद आई जिसमें उसने लिखा था कि पहलवान साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया ने रेलवे में ओएसडी खेल के अपने पद को दोबारा ज्वाइन कर लिया है। आंदोलन से पीछे हटने की खबर को अफवाह बताते हुए बजरंग पुनिया ने ट्वीट किया कि ‘आंदोलन वापस लेने की खबरें कोरी अफ़वाह हैं। ये खबरें हमें नुक़सान पहुँचाने के लिए फैलाई जा रही हैं। हम न पीछे हटे हैं और न ही हमने आंदोलन वापस लिया है। महिला पहलवान की एफ़आईआर वापस लेने की खबर भी झूठी है। इंसाफ़ मिलने तक लड़ाई जारी रहेगी।’ मीडिया रिपोर्ट्स में सबसे पहले साक्षी को आंदोलन से पीछे हटने की बात कही थी। इसके बाद साक्षी ने ट्वीट कर खुद इन खबरों का खंडन किया। साक्षी ने कहा कि इंसाफ की लड़ाई जारी रहेगी, बस वह अपनी जिम्मेदारी यानी काम पर वापस लौट गई हैं।

विनेश फोगाट ने भी ट्वीट कर कहा की ‘हमारे मेडलों को 15-15 रुपए के बताने वाले अब हमारी नौकरी के पीछे पड़ गये हैं।हमारी ज़िंदगी दांव पर लगी हुई है, उसके आगे नौकरी तो बहुत छोटी चीज़ है। अगर नौकरी इंसाफ़ के रास्ते में बाधा बनती दिखी तो उसको त्यागने में हम दस सेकेंड का वक्त भी नहीं लगाएँगे। नौकरी का डर मत दिखाइए।

और तो और बृज भूषण सिंह के खिलाफ दर्ज शिकायत वापस लेने वाली फ़र्जी खबर का  खंडन करते हुए, पीड़िता के पिता ने कहा है कि उन्होंने अपनी शिकायत वापस नहीं ली है। इस तरह के जो भी दावे किए जा रहे हैं वे बेबुनियाद हैं। पीड़िता के पिता ने कहा कि उन्होंने पटियाला हाउस कोर्ट से बृजभूषण के खिलाफ शिकायत वापस नहीं ली है।उन्होंने कहा, मैं कुछ वक्त से बाहर था और सोशल मीडिया, टीवी चैनलों से पता चला। मैं देख रहा हूं कि पहलवानों के खिलाफ जमकर फेक न्यूज चली जा रही है। मेरी बेटी की उम्र के बारे में भी गलत न्यूज दी गई। वह नाबालिग है और मैं अपनी शिकायत क्यों वापस लूं।

अमित शाह से मुलाकात के बाद क्या होगी बृजभूषण की गिरफ्तारी?

हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक कोई भी ठोस कार्रवाई नही की गयी है। लेकिन 5 जून को बृजभूषण समर्थन में होने वाली जन चेतना रैली को धारा 144 का हवाला देते हुए रद्द कर दिया गया है। साथ ही साथ पार्टी ने सांसद को सख्त मना किया है कि वह किसी भी मुद्दे पर कोई आक्रामक बयान न दें। सूत्रों से चली खबर में पार्टी आलाकमान ने बृजभूषण सिंह से साफ कहा है कि वह मीडिया में किसी भी तरह की बयानबाजी से बचें।

इसके साथ ही बृजभूषण शरण सिंह को सार्वजनिक मंचों पर पहलवानों से संबंधित किसी भी मुद्दे पर कोई बयान देने से सख्त मना किया गया है।

इसके बाद पहलवानों की अमित शाह से मुलाकात से सरकार के साथ इस मुद्दे पर बातचीत का दरवाजा खुल गया है। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने आरोपी के घर जाकर तमाम लोगों के बयान भी दर्ज कर रही है। अब आने वाले दिनों में साफ हो पायेगा कि गृहमंत्री से मुलाकात का पहलवानों के मामले में कितना असर पड़ा और क्या अब गिरफ्तारी होगी या नहीं ?

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

About the Author

श्रिया गुप्ता
दिल्ली विश्वविद्यालय की पत्रकारिता की छात्रा हैं और forum4 के लिए रिपोर्टिंग करती हैं।

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