अमृता प्रीतम के 100 सालः वो कविताएं जो हर प्रेमी-प्रेमिका के दिलों में बसती हैं
तुम मिले तो कई जन्म मेरी नब्ज़ में धड़के तो मेरी साँसों ने तुम्हारी साँसों का घूँट पिया तब मस्तक में कई काल पलट गए- एक गुफा हुआ करती थी जहाँ मैं थी और एक…
तुम मिले तो कई जन्म मेरी नब्ज़ में धड़के तो मेरी साँसों ने तुम्हारी साँसों का घूँट पिया तब मस्तक में कई काल पलट गए- एक गुफा हुआ करती थी जहाँ मैं थी और एक…
शत-शत बार सदा भारत माँ के चरणों में वंदन है हिमा दास है बेटी और इसका बेटा अभिनंदन है कश्मीर से धनुषकोटि फैली इसकी हरियाली है इसकी वह डल झील हमें गंगा जमुना सी…
फिर एक सवाल उठा है दिल के किसी कोने में फिर आंखों से आंसू छलका है चुपके-चुपके रोने में कब तक भरी सभा मे पांचाली के केश दबोचे जाएंगे कब तक न्यायालय में पीड़ितों…
“चापलूसी का ज़हरीला प्याला आपको तब तक नुकसान नहीं पहुँचा सकता जब तक कि आपके कान उसे अमृत समझ कर पी न जाएँ।” -मुंशी प्रेमचंद बनारस के पास स्थित लमही गाँव में आनंदी देवी और…