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कविता

पूरी दुनिया नापी जाए

डंडा जोर घुमाया जाए कि गिल्ली दूर तलक जाए, खाली पांव ही क्यूँ न पूरी दुनिया नापी जाए।   इन आँखों में सपने ऐसे ही पलते है, वनांचल के बच्चें मीलों मील चलते हैं।  …


देश के ताजा हालात पर एक प्रश्न- क्या लिखूँ?

सत्ता की दलाली या अंतर्रात्मा की आवाज़ लिखूँ? झूठ का साम्राज्य या सच का ख्वाब लिखूँ? क्या लिखूँ?   उन्नाव के किसानों का आर्द्र रूदन या बिचौलियों की सरकार लिखूँ? मजदूरों की कुदाल या पूँजीपतियों…


हम देशी हैं साहब 

जब सरकारी कर्मचारियों की छंटनी हो रही हो , दिनोंदिन चुपचाप बिना कोई शोर जब सरकारी कम्पनियां बंद कराई जा रही हैं जबरन मुनाफे के बावजूद , दिनोदिन चुपचाप बिना कोई शोर और दूसरी ओर…


एक बदरिया

आयी आयी मोर नगरिया झूठ बोलती एक बदरिया गड़ गड़ की ध्वनि रही सुनाती पर न बरसी वो इह डगरिया ।   छायी बनकर घुँघराली सी लगती कितनी मतवाली सी कजरारे से नयन दिखाकर सज…