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आदर्श बहू बनना है तो “मंदिरों के शहर” बनारस की ओर रुख कीजिए, ऐसी पढ़ाई और कहीं नहीं!

आईआईटी बीएचयू में दाखिला लें, ‘डॉटर्स प्राइड: मेरी बेटी अभियान’ नाम से शुरू यह कोर्स बहुओं को बनाएगा आदर्श

बहू तो बहुत देखे होंगे लेकिन क्या आपने देखा है आदर्श बहू बनने का सपना। कहां ये आदर्श बनाने को लेकर पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। इस देश में हमेशा लड़कियों को ही सिखाया और पढ़ाया जाता है ऐसा कभी आपने सुना है क्या? नहीं न लेकिन अब ऐसा होने जा रहा है जब बहुएं भी कुछ सीखेंगी। देश के प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में स्थित केंद्रीय विवि “काशी हिंदू विश्वविद्यालय” का नाम तो आपकी जुबां पर जरूर होगा, क्योंकि इस विश्वविद्यालय ने अब तक बहुत ख्याति अर्जित की है। आईआईटी बीएचयू यानी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने न जाने कितने इंजीनियर दिए लेकिन अब यह अच्छी और संस्कारी या कुल मिलाजुलाकर यह भी कह सकते हैं कि आदर्श बहुएं भी बनाने जा रहा है।

प्रशिक्षण की शुरुआत आज से यानी 3 सितंबर से शुरू हो रहा। हम कोई मजाक नहीं कर रहे, बल्कि सच कह रहे हैं। अगर आदर्श बहू बनने का सपना हो तो यहां आकर प्रशिक्षण लीजिए।

गौरतलब हो कि आईआईटी बीएचयू का स्टार्ट अप यंग स्किल इंडिया महिलाओं और युवतियों को आदर्श बहू बनने का प्रशिक्षण देगा। यंग स्किल्ड इंडिया ने तीन महीने का एक ऐसा कोर्स मॉड्यूल तैयार किया है, जिससे न सिर्फ युवतियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि उनका सामाजीकरण भी होगा।

…तो जान भी लीजिए कैसे 3 महीने में आप बन जाएंगी आदर्श बहू

‘डॉटर्स प्राइड: बेटी मेरा अभियान’ नामक इस पाठ्यक्रम में युवतियों, महिलाओं को सेल्फ कांफिडेंस, इंटरपर्सनल स्किल, प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल, स्ट्रेस हैंडलिंग, मैरिज स्किल के साथ कंप्यूटर व फैशन स्किल सिखाया जाएगा।

स्टार्टअप के सीईओ नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि यह अपने आप में एक अनूठी पहल है, जो समाज के लिए नजीर बन सकती है। इस कोर्स में प्रोफेशनल स्किल ट्रेनर, फैशन डिजाइनर और काउंसलर की अहम भूमिका रहेगी।

तीन सितंबर से यह कोर्स वनिता इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन डिजाइन में शुरू किया जा रहा है। अप्रवासी भारतीय के सम्मलेन के समय बनारस से इस तरह की पहल, सबके लिए उत्सुकता और गर्व का विषय रहेगा, जिसकी तैयारी अभी से हो रही है। इस बारे में विस्तृत जानकारी हेल्पलाइन नंबर 8009321506  पर भी ली जा सकती है।

सोशल मीडिया पर जमकर हो रही आलोचना

सोशल मीडिया पर इस चीज की आलोचना की जा रही कि आखिर लड़कियों को ही क्यों सिखाया या पढ़ाया जाता है लड़कों को क्यों नहीं। इसका मजाक भी उड़ाया जा रहा है। फेसबुक और ट्विटर पर की गई ये तीन ही पोस्ट पढ़ लीजिए आपको समझ आ जाएगा कि आखिर इस खबर की इतनी चर्चा क्यों हो रही।

 

फेसबुक पर रीवा ने लिखा है कि “जनाब ! घर, बाहर, दफ़्तर, गली-सड़क-चौराहे और ”समाज”… हर जगह लड़कियों को तो ख़ूब सिखाया ही जाता है। कभी लड़कों को भी सिखाइए न! सिखाइए कि रास्ते चलते पीछे-पीछे गाना गाने से कुछ नहीं होता, लड़की उनका सुर-ताल नहीं सुनती, बस खीझ जाती है। सिखाइए कि आगे बढ़ी बाइक से अचानक पीछे मुड़कर देखने से और इशारे करने से अगर कुछ होता तो हर सड़कछाप की चलते-फिरते शादी हो जाती।”

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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