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बदनाम लेखक व फिल्म के गाने के बारे में आप शायद ही ये जानते होंगे!

गाने का एक दृश्यः यूट्यूब आभार

-सुकृति गुप्ता

बदनाम लेखक पर बनी फिल्म मंटो का पहला गाना- नगरी-नगरी रिलीज़ कर दिया गया है, जो नहीं सुने हैं, अब सुन लें…

बदनाम लेखक सआदत हसन मंटो पर आधारित फिल्म मंटो  का पहला गाना 31 अगस्त को यूट्यूब पर रिलीज़ कर दिया गया है। नवाज़ुद्दीन सिद्दिकी ने इसे अपने ट्विटर अकाउंट पर भी शेयर किया है। गाने का नाम नगरी-नगरी है। लिखा मीराजी (Meeraji) ने है और गाया शंकर महादेवन (Shankar Mhadevan) ने है। संगीत स्नेहा खानवॉल्कर (Sneha Khanwalkar) ने दिया है। अब तक कई लोग इस गाने को सुन चुके हैं। जो नहीं सुने हैं, वो अब सुन लें। एकदम मस्त है। मंटो के ज़माने का मंटो जैसा! मतलब, यह गाना बताता है कि किस प्रकार एक मुसाफ़िर (यहाँ मंटो) घर जाने का रास्ता भूल गया है। हैरान-परेशान है। बेचैन है। यह बात मंटो ने अपने निबंध मैं क्यों लिखता हूँ में भी कही है- मेरी रूह बेचैन रहती है। मैं कभी पागलखाने में और कभी अस्पताल में रहता हूँ।

वीडियों में मंटो के जीवन से जुड़े कई दृश्य हैं। खासकर मंटो की जीवनसंगिनी साफिया मंटो और उनके रूमानी दृश्य। उनके प्रिय मित्र श्याम की भी एक झलक है। फिल्म में साफिया का किरदार रसिका दुग्गल निभा रही हैं और श्याम का किरदार ताहिर राज भसीन (Tahir Raj Bhasin) अदा कर रहे हैं। एक बात अजीब है। श्याम दिख गए पर अब तक मंटो जैसी मंटो की प्रिय मित्र इस्मत चुग़ताई लाइमलाइट में नहीं आई हैं। खैर, उनका किरदार राजश्री देशपाण्डे निभा रही हैं।

यह गाना फिल्म के प्रोमोशन के लिए बनाया गया लिरिकल विडियो है। लिरिक्स के साथ-साथ डायलॉग्स भी हैं। वीडियो की शुरुआत ही इस डायलॉग से होती है-

मंटो साब बड़ी खुशी हुई आपसे मिलकर!

अभी तो मिले हैं, इतनी जल्दी खुशी भी हुई।

यह फिल्म 21 सितंबर को रिलीज़ हो रही है। अब तक फिल्म के सभी-सभी छोटे-छोटे वीडियों देखकर तो यही लगता है कि पूरी फिल्म देखकर भी खुशी होगी। फिल्म को लिखा नंदिता दास ने है और निर्देशन भी उन्हीं ने किया है।

गाने के बीच में एक और डायलॉग है। मंटो साफिया से पूछते हैं- तुम भी शेव करती हो क्या?

ये सुनकर मंटो की कहानी मिस्टर हमीदा  याद आ जाती है जिसमें मंटो ने दाढ़ी-मूँछों वाली “पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम” से पीड़ित हमीदा नाम की लड़की की कहानी लिखी है।

गाने के लिरिक्स के साथ-साथ उसके दृश्य भी मुसाफिर होने का अहसास कराते हैं। उदाहरण के लिए गाने के शुरु में ही तांगा वाला दृश्य। ट्रेन के दृश्य के साथ ट्रेन की आवाजें, और भी बहुत कुछ है। आप सुनकर देखिए। 

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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