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यूजीसी ने एमफिल-पीएचडी प्रवेश परीक्षा में आरक्षण को दी मंजूरी, जानिए पूरा मामला

-सुकृति गुप्ता

यूजीसी ने एमफिल-पीएचडी के हालिया नियम में एक बदलाव किया है। अपनी वेबसाइट पर नोटिस जारी करते हुए यूजीसी ने जानकारी दी है कि प्रवेश परीक्षा में आरक्षित वर्ग को 5 फीसद की छूट दी जाएगी। हालांकि प्रवेश परीक्षा में पास होने के लिए न्यूतम अंक में कोई बदलाव नहीं किया गया है। प्रवेश परीक्षा में पास होने के लिए सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 50 फीसद और आरक्षित वर्ग के लिए न्यूनतम 45 फीसद (5 फीसद की छूट) अंक लाना अनिवार्य रहेगा। ये छूट एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए है।

इसके बावजूद भी यदि आरक्षित वर्ग में सीटें खाली रह जाती हैं तो उन्हें विशेष प्रवेश अभियान के ज़रिए भरा जाएगा। इस संदर्भ में यूजीसी के नोटिस में कहा गया है-

यदि छूट के बावजूद, अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/ अन्य पिछड़ा वर्ग (नॉन क्रीमी लेयर)/ निशक्त श्रेणियों के लिए आवंटित सीटें खाली रह जाती हैं तो संबंधित विश्वविद्यालय सामान्य श्रेणी के लिए प्रवेश प्रक्रिया की समाप्ति के एक माह के भीतर उस विशिष्ट श्रेणी के लिए विशेष प्रवेश अभियान चलाएगा। संबंधित विश्वविद्यालय अपनी स्वयं की प्रवेश प्रक्रिया के साथ ही अर्हता शर्तें तैयार करेगा ताकि इन श्रेणियों में अधिकांश सीटें भरी जा सकें।

क्या है पूरा मामला

दिल्ली विश्वविद्यालय में एमफिल-पीएचडी की प्रवेश परीक्षा में आरक्षण न लागू करने के कारण आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों ने लगातार जमकर प्रदर्शन किया। कई शिक्षकों ने भी इसकी निंदा की। यूजीसी की ओर से प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम अंक 50 फीसद रखने का भी विरोध किया गया था। इस कारण यूजीसी के आदेश पर एमफिल-पीएचडी के साक्षात्कार अगले आदेश तक स्थगित कर दिए गए थे।

2016 के नियमों का किया गया था विरोध

2016 में यूजीसी ने एमफिल-पीएचडी के लिए नए नियम बनाए थे। इस नियम के तहत डिस्टैंस मोड में कोई भी विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को पीएचडी नहीं करा सकता था। इसके अलावा प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम 50 फीसद अंक लाना अनिवार्य कर दिया गया था। वहीं एमफिल–पीएचडी में दाखिला पूर्ण रूप से साक्षात्कार के आधार पर तय किया गया था। मतलब प्रेवेश परीक्षा महज़ अगले पड़ाव यानी साक्षात्कार तक पहुँचने के लिए थी तथा साक्षात्कार को 100 फीसद की वेटेज दी गई थी।

बाद में विद्यार्थियों के विरोध को देखते हुए नियम में बदलाव किए गए। इसके तहत 70 फीसद वेटज लिखित परीक्षा को तथा 30 फीसद वेटेज साक्षात्कार को दिए गए।

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Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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