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डीयू के मैत्रेयी कॉलेज की छात्राओं ने किया हस्तिनापुर का भ्रमण

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से सम्बद्ध मैत्रेयी महाविद्यालय ने मिड सेमेस्टर ब्रेक का सदुपयोग करते हुए अपने विद्यार्थियों के ज्ञान संवर्धन हेतु व्यवस्थित रूप में प्रत्येक विभाग के लिए शैक्षणिक कल्चरल टूर का आयोजन किया। इसी क्रम में शनिवार को संस्कृत विभागीय कल्चरल ट्रिप उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर का परिभ्रमण करने के लिए गया।

इसमें संस्कृत ऑनर्स प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष की लगभग सभी छात्राएं, बीए प्रोग्राम प्रथम वर्ष में अध्ययनरत आठ छात्राएं एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार सिंह तथा अन्य अध्यापक डॉ. प्रीति वर्मा, डॉ. रेखा कुमारी, डॉ. कुमुद रानी गर्ग, डॉ. अनिरुद्ध ओझा, डॉ. विजय नारायण गौतम, डॉ. नागेंद्र व डॉ. राजेश कुमार मिश्र सहित कुल 76 लोग सम्मिलित हुए।

हस्तिनापुर का ऐतिहासिक महत्व

संस्कृत विभागीय ट्रिप बस द्वारा प्रातः 11.30 बजे हस्तिनापुर पहुँची। वहां पहुंचकर भ्रमणार्थियों ने सर्वप्रथम अष्टद्वीप एवं प्राचीन दिगम्बर जैन मंदिर का अवलोकन किया। इसके बाद दोपहर का भोजन करके कैलाश पर्वत दिगम्बर जैन मंदिर का परिभ्रमण किया। वहां से जम्बूद्वीय का भ्रमण करके प्रसिद्ध पांडेश्वर मन्दिर में श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया। संस्कृत विभाग का यह टूर सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टियों से अति लाभकारी रहा। इस टूर से संस्कृत के विद्यार्थी प्राचीन ग्रन्थों में उल्लिखित हस्तिनापुर नगरी की वर्तमान अवस्थाओं के साथ-साथ यहां विद्यमान तत्कालीन अवशेषों के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व से भी सुपरिचित हुए।

जैन धर्म के लिए भी पावन स्थली

ध्यातव्य है कि हस्तिनापुर प्राचीन काल में कौरवों की राजधानी थी, जिसका सीधा सम्बन्ध संस्कृत भाषा से है। महर्षि वेदव्यास द्वारा संस्कृत भाषा में लिखित विश्व प्रसिद्ध महाकाव्य महाभारत में हस्तिनापुर नगरी का विस्तार से वर्णन मिलता है। गंगा नदी के किनारे बसी यह नगरी पांडवों एवं कौरवों की जन्मस्थली थी। कालांतर में कौरवों ने हस्तिनापुर को ही अपनी राजधानी के रूप में प्रतिष्ठित किया था। यहां पर द्रौपदी घाट एवं एतदरिक्त चक्रवर्ती सम्राट भरत की राजधानी भी हस्तिनापुर ही थी। हस्तिनापुर का शाब्दिक अर्थ हाथियों की नगरी है, इससे यह ध्वनित होता है कि पहले यहाँ हाथी बहुतायत में पाए जाते रहे होंगे। सनातन धर्म के साथ ही जैन धर्म के लिए भी यह अति पावन स्थली है। आज भी यहां अनेक जैन मंदिर विद्यमान हैं।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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