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डीयू: शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने की मांग, कुलपति को लिखा पत्र

गूगल : आभार

डीयू में 4500 तदर्थ शिक्षकों के पदों पर होनी है स्थायी नियुक्ति

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में शिक्षकों की नियक्ति लंबे समय से नहीं की जा रही है। इसको लेकर डीयू विद्वत परिषद के सदस्य प्रो. हंसराज ‘सुमन’ ने कुलपति प्रो. योगेश कुमार त्यागी को पत्र लिखकर मांग की है कि विभागों और कॉलेजों में स्थायी नियुक्ति के लिए जो विज्ञापन निकाले गए थे उन पदों को भरने के लिए जल्द से जल्द प्रक्रिया शुरू की जाए। यदि इन पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू नहीं की तो विज्ञापनों की समय सीमा समाप्त हो जायेगी। सारे विज्ञापन रद्द हो जाएंगे, जिससे उम्मीदवारों केे धन व समय की बर्बादी होगी।

प्रो. हंसराज सुमन ने बताया है कि वर्ष 2017 में डीयू के विभिन्न विभागों एवं कॉलेजों में शैक्षणिक पदों के लिए 45 कॉलेजों ने अपने यहां 2047 पदों के विज्ञापन निकाले। इसके अलावा विभागों में सहायक प्रोफेसर के 378, एसोसिएट प्रोफेसर के 399 और प्रोफेसर के 153 पदों का विज्ञापन निकाला गया। आवेदन हेतु निकाले गए विज्ञापन के आधार पर 4 लाख 11 हजार आवेदन पत्र प्राप्त हुए। विश्वविद्यालय ने आवेदन पत्रों की विषयवार स्क्रुटनी और स्क्रीनिंग का कार्य पूरा करने के बाद उम्मीदवारों के अंक विभाजन कर मेरिट लिस्ट बनाई जा चुकी है। उन्होंने यह भी बताया है कि जिन 62 विषयों की स्क्रीनिंग लिस्ट तैयार की गई थी उनकी लिस्ट संबंधित कॉलेजों व विभागों को भेजी जा चुकी है।

स्थाय़ी नियुक्ति न होने से शिक्षक तनाव में

अपने पत्र में प्रो सुमन ने बताया है कि कॉलेज व विभाग स्तर पर आवेदन पत्रों की स्क्रूटनी और स्क्रीनिंग के बाद लॉ फैकल्टी, शिक्षा विभाग और मैनेजमेंट आदि में शिक्षकों के स्थायी पदों के लिए साक्षात्कार हो चुके हैं, जिसमें 150 पदों पर नियुक्ति की जा चुकी है। लेकिन, नाम मात्र की कुछ नियुक्तियों के बाद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह से ठप हो गई है। पिछले एक दशक से भी अधिक समय से खाली पदों पर पढ़ा रहे तदर्थ (एडहॉक) शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति न हो पाने के कारण वे बेहद तनाव पूर्ण जीवन जीने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया है कि लगभग आधा दर्जन शिक्षक इस तनाव का सामना नहीं कर सके और उनकी जीवन लीला समाप्त हो गई।

उन्होंने यह भी बताया है कि इन एडहॉक शिक्षकों में अधिकांश लोग अपनी सर्विस का आधा से अधिक समय एडहॉक शिक्षक के रूप में व्यतीत कर चुके हैं और आज भी उनका भविष्य दाव पर है। उन्होंने बताया है कि एक एडहॉक शिक्षिका विवेकानंद कॉलेज में अपनी सेवा समाप्त कर सेवा मुक्त हो चुकी हैं, इसी तरह से 45 वर्ष से 57 के बीच की उम्र के शिक्षकों की काफी संख्या है।

कहां कितनी रिक्तियां

डीयू में फरवरी 2017 में विभिन्न विभागों में 830 पदों के विज्ञापन निकाले गए थे। इन पदों में सहायक प्रोफेसर (सामान्य-187, एससी-55 ,एसटी-29, ओबीसी-100, पीडब्ल्यूडी-07) के कुल 378 पद हैं। इसी तरह से एसोसिएट प्रोफेसर (सामान्य-293, एससी-55, एसटी-33, पीडब्ल्यूडी-18) के कुल 399 पद हैं। ठीक इसी प्रकार प्रोफेसर (सामान्य111, एससी-25, एसटी-10, पीडब्लूडी-07) के कुल 153 पद बने।

इसी तरह डीयू से संबद्ध 45 कॉलेजों ने अपने यहां स्थायी पदों के विज्ञापन निकाले। इन पदों में सामान्य-992, एससी-296, एसटी-154, ओबीसी-498, पीडब्ल्यूडी-75 के पदों पर नियुक्ति के विज्ञापन निकाले गए थे लेकिन, इन विभागों के बाद कॉलेज स्तर पर साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू की गई थी जिसमें, दौलतराम कॉलेज में एक विभाग में साक्षात्कार हुआ, इसके बाद से न तो किसी कॉलेज में साक्षात्कार कराए गए और न ही किसी विभाग में।

जल्द ही नियुक्ति और प्रमोशन के लिए कमेटी बनाने की मांग

प्रो. सुमन ने आगे बताया है कि दौलतराम कॉलेज में स्थायी नियुक्ति के बाद से किसी भी कॉलेज में स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई और न ही आज तक किसी कॉलेज में प्रमोशन ही हुआ। पिछले एक दशक से नियुक्ति और प्रमोशन न किए जाने के कारण शिक्षकों को आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है। इसलिए जल्द से जल्द नियुक्ति के लिए कमेटी और प्रमोशन कमेटी बनाकर शिक्षकों की प्रमोशन का रास्ता खोला जाना चाहिए।

उनका कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में लंबे समय से पढ़ा रहे एडहॉक शिक्षकों के जो विज्ञापन निकाले गए थे उन विज्ञापनों को निकाले लगभग डेढ़ साल होने वाला है, उनकी समय सीमा जल्द ही समाप्त होने वाली है। विज्ञापन रद्द होने से पहले कॉलेजों व विभागों में एक साथ नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कराए। यदि इन विज्ञापित पदों की नियुक्ति नहीं हुई तो जिन उम्मीदवारों ने आवेदन पत्रों के साथ आवेदन शुल्क जमा कराया हुआ है, वह विश्वविद्यालय को लौटाना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी मांग की है कि जिन कॉलेजों द्वारा विज्ञापित पदों पर साक्षात्कार नहीं कराए गए हैं। कॉलेजों को उम्मीदवारों के आवेदन शुल्क के साथ आवेदन राशि ब्याज सहित लौटाई जाये क्योंकि जो राशि उम्मीदवारों से ली गई है उसका ब्याज विश्वविद्यालय व कॉलेजों ने लिया है। इसलिए बेरोजगार युवाओं को उनकी राशि ब्याज सहित वापिस की जाए।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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