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डीयू में तैनात सुरक्षाकर्मियों का हो रहा शोषण, वेतन कटौती कर किया जा रहा घोटाला!

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में कला संकाय में विभिन्न जगहों पर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं जिनका डीयू प्रशासन और एक कंपनी की ओर से पिछले 3 साल से बुरी तरह का शोषण करने का मामला सामने आया है। बता दें कि रक्षक सिक्योरिटी प्रा. लिमिटेड एजेंसी की ओर से कॉंन्ट्रैक्ट आधार पर कला संकाय में विभिन्न जगहों पर सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। ये सुरक्षाकर्मी डीयू के विभिन्न विभागों और छात्रावास में अपनी ड्यूटी निभाते देखे जा सकते है। आरोप है कि कंपनी इन रक्षक कर्मचारियों के साथ जबरदस्त अन्याय कर रही है और उनके निर्धारित वेतन से भारी कटौती करने के अलावा एरियर/बोनस भी नहीं दे रही है। इससे सभी सुरक्षाकर्मियों में गुस्सा भी है, लेकिन वे अपने पद पर बने रहने के लिए भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।

करीब 126 सुरक्षाकर्मियों ने अपने ऊपर हो रहे अन्याय को लेकर अपना हस्ताक्षरित आवेदन डीयू के कुलपति और कुलसचिव के नाम लिखा है। इस पत्र में अपने ऊपर हो रहे शोषण को उजागर करते हुए कर्मचारियों ने लिखा है कि 1 नवंबर 2015 के रक्षक सिक्योरिटी एजेंसी का अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) डीयू के कला संकाय अनुभाग के बीच हुआ। यह अनबंध 31 जुलाई 2018 तक यानी 33 माह तक चला। डीयू की ओर से इन्हें हर माह 584 रुपये के हिसाब से बोनस दिया जाना था, लेकिन सुरक्षा एजेंसी ने सुरक्षाकर्मियों को नहीं दिया गया। यहां तक कि सुरक्षाकर्मियों को मनमाने तरीके से वेतन के रूप में कुछ भी पकड़ा दिया जाता है। इस वेतन की कोई रशीद भी नहीं दी जाती। इतना ही नहीं सुरक्षाकर्मियों को निर्धारित वेतन का भी नहीं पता कि आखिर कितना रुपया किस माह मिलेगा। हर महीने वेतन से भारी कटौती कर पैसे हड़प लिए जाते हैं।

गुलामी या नौकरी? इन आंकड़ों पर एक नजर डालिए

सुरक्षाकर्मियों को 1 नवंबर, 2015 का अनुबंध लागू होने के बाद के कुछ महीने तक 8600 रुपये मासिक वेतन दिया गया। इसके बाद 9284 रुपये दिया गया जोकि परिवार का खर्च चलाने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। 1 नवंबर 2015 से लेकर 31 जुलाई 2018 तक का हर माह 584 के हिसाब से बोनस दिया जाना था, वह भी नहीं दिया गया।

सुरक्षा कर्मियों का कहना है कि हम गरीबों का शोषण किया जा रहा है। उनका कहना है कि श्रम विभाग के कैबिनेट निर्णय 03-03-2017 के आधार पर वेतनमान 14698 दिया जाना चाहिए जबकि हमें 15-06-2017 को भी 9284 रुपये ही वेतन के रूप में दिए गए।

इसके बाद 01-04-2017 को 260 रुपये की महंगाई भत्ता (डीए) बढ़ोतरी हुई। इसके अनुसार हमारा वेतन 14958 रुपये मिलना था, लेकिन 15-07-2017 से 12677 रुपये प्रति माह वेतन दिया गया। डीए में फिर से एक बार 338 रुपये की इस साल बढ़ोतरी हुई, जिसके बाद 15296 रुपये मिलना था, लेकिन ये बढ़ोतरी भी नहीं की गई। इसके बाद भी डीए में बढ़ोतरी होती रही, लेकिन हमारा वेतन पहले के हिसाब से 12677 रुपये हर माह ही रहा।

जुलाई 2018 के बाग 01 अगस्त 2018 को फिर से अनुबंध 2 साल के लिए बढ़ाया गया, लेकिन पिछले सालों में दिए जा रहे वेतन घोटाले के मामले में कोई जांच नहीं की गई। डीयू प्रशासन की ओर से कोई जांच कमेटी नहीं गठित करना तो दूर किसी को कोई मतलब तक नहीं है।

शोषण पर शोषण यानी महाशोषण

वेतन घोटाले के बाद अगस्त 2018 में 2 साल के अनुबंध बढ़ाए जाने के बाद पुनर्नियुक्ति के नाम पर सुरक्षाकर्मियों के वेतन से 5000 रुपये और काट लिए गए। यानी अब मूल वेतन के रूप में 14 सितंबर 2018 को केवल 10677 रुपये ही दिए गए।

18 अक्टूबर को इन्हें मासिक वेतन केवल 4654 रुपये ही दिए गए। इसके बाद दिसंबर में 11181 रुपये दिए गए जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 15400 रुपये दिए जाने थे।

सभी रक्षक सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि अगर वे वेतन को लेकर एजेंसी से किसी प्रकार की पूछताछ करते हैं तो उन्हें धमकी भी दी जाती है कि उन्हें अगर नौकरी करनी है तो उन्हें चुप रहना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो नौकरी से निकाल दिया जाएगा। इस तरह से भय के माहौल में जीने को मजबूर इन सुरक्षाकर्मियों ने 21 दिसंबर 2018 को आवेदन पत्र के माध्यम से शिकायत तो कर दिया लेकिन, अब आगे क्या होगा इस बारे में देखना काफी दिलचस्प होगा।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

3 Comments on "डीयू में तैनात सुरक्षाकर्मियों का हो रहा शोषण, वेतन कटौती कर किया जा रहा घोटाला!"

  1. sir ye tho bol dete ke jo pasie milte hai unka bhi Kuch time nahi Kabhi 15 17 20 25 26 kuch pakha nahi hai or jo aapne dala hai isko share Karo ye bhi b

  2. sulabh ka bhi to yahi hal hai delhi university k andar

  3. Sir ab decmber month ka be 12900rs diya gaya he

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