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डीयूः एसी की 12 दिसंबर को होने जा रही बैठक में यूजीसी रेगुलेशन का मुद्दा ही गायब

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की सर्वोच्च संस्था विद्वत परिषद (एसी) की डेढ़ साल के बाद 12 दिसम्बर को बैठक होगी। लेकिन, इस बैठक में यूजीसी विनियमन का मुद्दा शामिल नहीं है, जिसे लेकर विद्वत परिषद के सदस्यों में काफी रोष है। उन्होंने मांग की है कि इसे कमेटी द्वारा अनुशंषित सभी विषयों को 12 दिसम्बर की बैठक के एजेंडे में सम्मिलित किया जाए। बता दें कि यूजीसी विनियमन 2018 को लागू कराने के लिए डीयू प्रशासन ने शिक्षकों की सेवाशर्तों, नियुक्तियों, पदोन्नतियों की प्रक्रिया और कार्यवाही पर निगरानी रखने तथा उसे समुचित तरीके से लागू करने हेतु एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की थी, जिसने अपनी रिपोर्ट 28 नवम्बर को सौंप दी थी।

विद्वत परिषद के सदस्य प्रो. हंसराज ‘सुमन’ ने बताया है कि 6 दिसम्बर को देर शाम 12 दिसम्बर को हो रही विद्वत परिषद की बैठक का एजेंडा ईमेल द्वारा प्राप्त हुआ, जिसे देखकर अचंभित रह गया कि उसमें यूजीसी के नियामक कानून (यूजीसी रेगुलेशनः 2018 ) को शामिल नहीं किया है। मतलब साफ है कि शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति और पदोन्नति इस एजेंडे के किसी भी विषय के रूप में नहीं है, जबकि 28 नवम्बर को उच्च स्तरीय़ कमेटी ने जब इस रिपोर्ट पर सभी साथियों ने हस्ताक्षर किए थे तो कहा गया था कि आगामी विद्वत परिषद की बैठक में महत्वपूर्ण रूप से इसे एजेंडे में रखा जाएगा, ताकि जल्द से जल्द यह पारित होकर अध्यादेश बनकर तैयार हो। प्रो. सुमन ने खेद व्यक्त करते हुए बताया है कि सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात यह है कि इस एजेंडे के तहत बहुत ही गिने चुने विषयों को रखा गया है और आमतौर पर शिक्षकों से संबंधित मुद्दों को हटा दिया गया है जबकि कॉलेजों में प्राचार्यों की नियुक्ति संबंधी विषयों को एजेंडे में प्रमुख स्थान दिया गया है। यह बात विश्वविद्यालय की विसंगतिपूर्ण प्रशासनिक प्राथमिकता की तरफ इशारा करती हैं और अपने ही शिक्षकों के भेदभाव को प्रस्तुत करती है।

प्रो. सुमन ने कमेटी के सदस्य होने के नाते कुलपति प्रो. योगेश कुमार त्यागी से मांग की है कि यूजीसी विनियमन को लागू करने संबंधी जो कमेटी बनी है और जिसने अपनी अनुशंसा सौंप दी है उसे 12 दिसम्बर की एसी की बैठक में प्रस्तुत करने का आश्वासन दें। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द यूजीसी विनियमन 2018 को पारित करते हुए जो सुधार किए हैं जैसे एडहॉक सर्विस काउंट करना, एडहॉक शिक्षिकाओं का मातृत्व अवकाश, एडहॉक को साक्षात्कार में प्राथमिकता देना, बिना पीएचडी एसोसिएट प्रोफेसर बनाना, कॉलेजों में प्रोफेशरशिप लागू करना, एडहॉकइज्म को समाप्त करने के लिए स्थायी नियुक्ति करना, लंबे समय से शिक्षकों की पदोन्नति न होना आदि मुद्दों को एसी की बैठक में रखा जाए।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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