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असहिष्णु लोगों का गढ़ बन चुकी है बीजेपी!

तस्वीर गूगल साभार

-अभय प्रताप सिंह

अभी कुछ रोज पहले ही 1975 में इंदिरा गांधी के द्वारा लगाए गए आपातकाल पर संघ और बीजेपी के मित्रों ने फेसबुक पर खूब बवाल काटा। दूसरा बवाल सुषमा स्वराज के द्वारा पासपोर्ट वाले मामले पर काटा। इस पर तो इतना काट लिया कि यह समझ में आ गया कि ‘अगर समर्थक कटहा हो तो बड़े से बड़ा विकासपुरुष फटहा नजर आता है’। रही सही कसर रुपये की गिरती साख और भारत में महिलाओं की असुरक्षा की रिपोर्ट ने पूरी कर दी।

दशा तो यह है कि बीजेपी, कांग्रेस या अन्य पार्टियां सिर्फ मुद्दे खोज रही हैं, एक-दूसरे को घेरने के लिए। सुषमा के मसले में बीजेपी और  संघियों ने उन्हें खूब लताड़ा! अब कुछ लोगों को हैरानी हुई होगी कि कैसे उन्हीं के समर्थक उनके विरोधी बन गए? देखो भैया टेंशन ना लो वर्तमान में स्थिति तो यह है कि बीजेपी असहिष्णु लोगों का गढ़ बन चुकी है! भारत की यही खूबी रही है कि इस देश की मिट्टी ने असहिष्णुता का कभी पनपने नहीं दिया है और जिस किसी ने असहिष्णुता का पोषण किया है, वह इस सरजमीं से मिट गया है! यद्दपि यह बात हमारे भाजपाई मित्रों को कदापि समझ नहीं आएगी, क्योंकि अगर समझ आती तो पासपोर्ट वाले मुद्दे को अंगूठे पर ना उठा लेते। इतनी मेहनत तो श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाने में ना की होगी।

आलम तो यह है कि सोशल मीडिया पासपोर्ट के नियमों का हवाला देते हुए सुषमा को दोषी ठहराने में पट गया और उनका नया नामकरण कर दिया गया ‘वीजा माता’! यही नहीं उन पर सांप्रदायिक टिप्पणियां भी की गईं। इस पर मेरे कुछ मित्रों को दिक्कत है कि कैसे आईटी सेल के लोग इतना गलत कर सकते हैं अपने ही नेता के साथ! एक थोड़े से लिबरल भाजपाई मित्र ने मुझे अपनी व्यथा बताई। बताने लगे कि उन्हें बचपन की वह घटना याद आ गई, जिसने कई रात उनको सोने नहीं दिया था। उनके घर में बिल्ली ने बच्चों को जन्म दिया। तब वह छठवीं में थे। कुछ दिन बाद उन्होंने देखा कि वह अपने ही बच्चे को मार रही है और अंत में मार ही डाला। उन्हें उस वक्त समझ नहीं पाया, लेकिन फिर उन्होंने आने वाले जीवन में यही देखा कि जब कोई महत्वहीन हो जाता है तो उसकी छंटाई की जाती है। इस पर मेरे दूसरे मित्र बोले जैसे मार्गदर्शकों की छंटाई की गई। इस पर मेरे भाजपाई मित्र चुप हो गए।

 

(यह लेखक के निजी विचार हैं, इससे फोरम4 का सहमत होना कतई जरूरी नहीं है)

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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