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मंटो फ़िल्म के साथ रिलीज होगा मंटो की कहानियों का विशेष संकलन

मंटो फिल्म का पोस्टर

-सुकृति गुप्ता

नंदिता दास ने चुनी हैं कहानियाँ, राजकमल से होगी प्रकाशित

राजकमल प्रकाशन ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर जानकारी दी है कि वह जल्द ही मंटो की 15 चुनिंदा कहानियों का संकलन निकालने वाला है। इन 15 कहानियों को मंटो फिल्म की निर्देशक नंदिता दास ने चुना है, जो खुद मंटो की बहुत बड़ी प्रशंसक हैं।

किताब अभी बाज़ार में उपलब्ध नहीं हुई है लेकिन इसको लेकर कोई  विवाद न खड़ा हो जाए, इसलिए राजकमल प्रकाशन की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया है।

माना जा रहा कि किताब महज़ मंटो फिल्म का प्रचार करने के उद्देश्य से ही निकाली जा रही है। हालांकि राजकमल प्रकाशन ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि वे मंटो के साहित्य पर पहले भी किताबें निकालते रहे हैं। इसके पहले वे दस्तावेज़ के नाम से मंटो के लेखन के पाँच संस्करण निकाल चुके हैं। इसका मकसद मंटो को घर-घर तक पहुँचाना है। मंटो की 15 चुनिंदा कहानियों का संकलन भी इसी उद्देश्य से निकाला जा रहा है। पर इस बात को उन्होंने ज़रूर स्वीकार किया है कि यह किताब फिल्म के प्रोडक्शन हाउस और राजकमल प्रकाशन के संयुक्त प्रयास से निकाली जा रही है। किताब और फिल्म दोनों एक ही दिन रिलीज किए जाएंगे।

यह किताब अभी आधिकारिक रूप से बाजार में नहीं पहुँती है, पर 5 सितंबर को मुंबई में मंटो फिल्म की एक स्पेशल स्क्रीनिंग के अवसर पर इसकी कुछ सैम्पल प्रतियाँ वितरित की गई थीं। असल विवाद किताब के आवरण को लेकर है जो कि फिल्म के पोस्टर से मिलता जुलता है। इस संदर्भ में राजकमल प्रकाशन खुद लिखता है, “इसका मकसद मंटो के साहित्य और उन पर बन रही फिल्म को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाना है। इसलिए किताब का फ्रंट कवर फिल्म के पोस्टर का ही कुछ बदला हुआ रूप है। किताब के बैक कवर पर फिल्म के प्रोडक्शन हाउस का लोगो भी प्रकाशन के लोगो के साथ छपा है। यह किताब विशेष रूप से मंटो फ़िल्म के निर्माण के उपलक्ष्य में ही प्रकाशित हुई है। यह एक स्पेशल एडीशन भर है न कि रेगुलर एडिशन।”

राजकमल प्रकाशन ने भले ही स्पष्टीकरण दिया हो पर इस पर एक फेसबुक यूजर इकबाल अभिमन्यु ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है, “अजीब और अस्वीकार्य तर्क है। लेखक  हमेशा सम्पादक (जिनकी कोई सम्पादकीय पहचान भी नहीं है) और अभिनेता से अलग पहचान रखता है। आप नवाज़ का चेहरा मंटो पर नहीं थोप सकते। मंटो को घर-घर पहुँचाने के लिए नवाजुद्दीन या फिर राजकमल की भी दरकार नहीं है, बल्कि आप इस फ़िल्म के प्रमोशन में ज्यादा बह गए हैं।”

राजकमल प्रकाशन ने अपने फेसबुक पोस्ट में इसका स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि इस पहल के माध्यम से मंटो की छवि को अपदस्थ करना या हल्का करना हमारा ध्येय नहीं है। इस किताब के जरिए असली मंटो ही हर हाथ में आएंगे।

आपको बता दें कि नंदिता दास के निर्देशन में बन रही फिल्म मंटो 21 सितंबर को रिलीज हो रही है। नंदिता दास जमकर फिल्म के प्रमोशन में व्यस्त हैं। कान, सिडनी, लंदन, टोरंटो, दुबई, एशिया समेत कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भी यह फिल्म दिखाई जा चुकी है। फिल्म की तारीफ़ों के जमकर कसीदे काढ़े जा रहे हैं। 15 अगस्त से पूर्व नंदिता दास ने फिल्म के मज़मून (बोल के लब आज़ाद हैं तेरे) से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए थे। फ़िलहाल फिल्म के प्रमोशन के लिए आम लोगों में मौजूद मंटोइयत से जुड़े वीडियो और पोस्ट शेयर किए जा रहे हैं जिन्हें मॉडर्न डे मंटो  कहा जा रहा है।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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