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21 वीं सदी में हिंदी बन रही है बाजार की भाषा: जोशी

कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर उदघाट्न करते हुए, प्रो राम शरण जोशी, श्री संजय मिश्रा व अन्य

दिल्ली विश्वविद्यालय के अरबिंदो कॉलेज ने मनाया हिंदी दिवस 

श्री अरबिंदो कॉलेज के हिंदी विभाग के तत्वावधान में आज हिंदी दिवस के अवसर पर “हिंदी भाषा और राष्ट्र एकता” विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि देश के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राम शरण जोशी ने छात्रों को संबोधित भी किया। उन्होंने कहा कि ‘हिंदी अब सिर्फ कविता, कहानियों की भाषा नहीं रह गयी है, बल्कि चिंतन की भाषा बन चुकी है। आज दुनिया के कोने-कोने में हिंदी की अनुगूंज सुनाई पड़ रही है। उन्होंने मॉरिशस में हुए 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदी भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कोने-कोने तक अपनी पैठ बनाती जा रही है। हिंदी आज पूरी तरह से बाजार से जुड़ रही है और बॉलीवुड फिल्में और मीडिया के जरिये हिंदी की लोकप्रियता बहुत तेजी से बढ़ी है। विदेशों में भी लोग बॉलीवुड के हिंदी गीत गुनगनाते हुए देखे जाते हैं।

प्रो. जोशी ने हिंदी के बढ़ते प्रभाव पर उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका के लगभग प्रत्येक विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाई जाती है। सोशल मीडिया एवं ज्ञान विज्ञान के सभी क्षेत्रों में हिंदी की मान्यता बढ़ चुकी है। गूगल, फेसबुक, ट्विटर ही नहीं ऑक्सफोर्ड, सेज, मैकमिलन, पेंग्यून जैसे विश्व प्रसिद्ध प्रकाशक आज हिंदी में अनुवाद करके पुस्तकें छाप रहे हैं। यह उसकी विश्ववसनीयता और उपयोगिता ही है जिसमें वह सफल हो रही है।

प्रो. जोशी ने हिंदी भाषा और राष्ट्रीय एकता पर आगे बोलते हुए हिंदी को लेकर करियर बनाने के लिए उपलब्ध तमाम संभावनाओं पर विद्यार्थियों को जागरूक किया और कहा कि अब हिंदी में रोजगार की कमी नहीं है।

समारोह के विशिष्ठ अतिथि कॉलेज प्रबंध समिति के चेयरमैन और दैनिक जागरण पत्र के एसोसिएट एडिटर संजय मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि अब हिंदी दोयम दर्जे की भाषा नहीं रह गई है इसलिए इसको लेकर लोगों को शर्म नहीं बल्कि गौरव का अनुभव होना चाहिए। हिंदी की भूमिका राष्ट्रीय एकता स्थापित करने में अतुलनीय रही है, यही एक भाषा है जो समूचे देश में लोगों को कनेक्ट करती है।

संजय मिश्रा ने आगे कहा कि हिंदी राष्ट्र की अस्मिता की भाषा होने के साथ ही साथ आज करियर बनाने में भी अत्यंत सहायक है, इसके लिए सरकार को हिंदी के विकास में भरपूर योगदान देना चाहिए।14 सितम्बर सिर्फ उत्सव भर बनकर न रह जाए बल्कि उसके प्रसार के लिए सालों साल प्रयास किए जाने चाहिए।उन्होंने अपने ही समाचार पत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि दैनिक जागरण की शुरुआत अत्यंत छोटे स्तर पर हुई थी किंतु आज विभिन्न क्षेत्रों में 42 संस्करण निकाले जाते हैं जो कि अन्य भाषा -भाषी क्षेत्रों में भी लोकप्रिय है। यह हिंदी की लोकप्रियता ही नहीं बल्कि उपयोगिता है जो उसको विस्तार दे रही है।

मीडिया शिक्षक और विद्वत परिषद के सदस्य प्रो. हंसराज ‘सुमन’ ने हिंदी की व्यावहारिक उपयोगिता से छात्रों को परिचय कराया और बताया कि हिंदी में करियर बनाने की असीम संभावनाएं हैं। यदि छात्र अपने अध्ययन के दौरान हिंदी को गम्भीरता से एक विषय के रूप में लें तो अन्य मानविकी विषयों से अधिक रोजगार के अवसर आज हिंदी में उपलब्ध है।

हिंदी में करियर भी बना सकते हैं छात्र

प्रो. सुमन ने हिंदी में रोजगार की संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अनुवाद, मीडिया, राजभाषा अधिकारी, रंगमंच, सिनेमा, फिल्में, सीरियल, स्क्रिप्ट राइटिंग, शिक्षक, ब्यूरोक्रेट आदि अनेक क्षेत्र हैं जहां छात्र अपना करियर बना सकते हैं बशर्ते उसे सीखना पड़ेगा।उन्होंने बताया कि आज मीडिया ने हिंदी को विज्ञापन से जोड़ा है इसलिए हिंदी के विज्ञापन लोकप्रिय है। इसे बाजार की हिंदी जब तक नहीं बनाएंगे तब तक हिंदी विश्व पटल पर अपनी पहचान नहीं बना सकती। उन्होंने कबीर दास का उदाहरण देते हुए कहा है विश्व के अनेक देशों में कबीर दास इसलिए पढ़ाये जाते हैं वह मानव से मानव को जोड़ने की बात करते हैं।

इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विपिन कुमार ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अब हिंदी पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं सिर्फ साहित्य प्रेम के कारण नहीं इसे नहीं पढ़ते बल्कि इसे एक अवसर/करियर के रूप में हिंदी को अपना रहे हैं जो एक सुखद बात है।

कार्यक्रम का प्रारम्भ करने से पूर्व मुख्य अतिथि प्रो. राम शरण जोशी, संजय मिश्रा, डॉ विपिन कुमार, प्रो. हंसराज सुमन आदि ने दीप प्रज्ज्वलित कर हिंदी दिवस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। छात्राओं ने सरस्वती वंदना से अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. इला शंकर ने भी अपना वक्तव्य प्रस्तुत दिया। व्याख्यान के बाद हिंदी विभाग में सांस्कृतिक कार्यक्रम और भाषण, कविता पाठ, स्लोगन लेखन आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की, जिसमें छात्रों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन विभाग के शिक्षक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम में अनेक शिक्षकों ने भाग लिया इसमें डॉ सीमा, डॉ शिव मंगल कुमार, डॉ दीपा, डॉ विनय जैन, डॉ राजबीर सिंह आदि उपस्थित थे।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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