दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र क्यों होता जा रहा है लोकतंत्र विहीन?
“मजबूत लोकप्रियता, कमजोर लोकतंत्र की निशानी होती है” 2010 में ‘अरब स्प्रिंग’ ने दुनिया में लोकतंत्र के फैलाव को लेकर जो उम्मीदें जगाई थीं वो लगता है अब फिर से गहरी नींद में जा रहीं…
“मजबूत लोकप्रियता, कमजोर लोकतंत्र की निशानी होती है” 2010 में ‘अरब स्प्रिंग’ ने दुनिया में लोकतंत्र के फैलाव को लेकर जो उम्मीदें जगाई थीं वो लगता है अब फिर से गहरी नींद में जा रहीं…
चीन से फैले कोरोना वायरस की महामारी ने पूरे विश्व को तहस नहस कर डाला। अब तक 52 लाख से अधिक लोग इससे अपनी जान गवां चुके हैं। भारत में ही करीब 5 लाख लोगों…
‘लोकतंत्र खतरे में हैं’, ये शुरुआती पंक्ति है इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर डिमोक्रेसी ऐंड इलेक्टोरल असिस्टांस (International-IDEA) संस्था की 2021 के रिपोर्ट की जो इस सोमवार को जारी हुई है। 1995 में स्थापित स्वीडन की ये…
सरकार के पास अपने नागरिकों का लेखा जोखा न हो ऐसा कहां हो सकता है। लेकिन आजकल सरकार अपने पास कई संवेदनशील विषयों पर आंकड़े न होने का दावा करने लगी है। अब तक ऐसे…