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संस्कार

इतने भी क्यों अंधविश्वासी हों

क्या मैं अंधविश्वासी हूं? हां अगर मैं अपने अतीत में झाकूं तो कह सकता हूं कि, मैं अंधविश्वासी था, बचपन में। जिस तरह से बीते कल और आज में काफी बदलाव हो चुका है, ठीक…

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प्रधानमंत्री जी! प्राचीन भारत में बस हम पहुंचने वाले हैं, थोड़ा और जोर लगाइए…

आदरणीय प्रधानमंत्री जी, मैं आधुनिक भारत के सख्त खिलाफ था और अभी भी हूँ। मैं प्राचीन भारत देखना चाहता हूँ। आप भी इसके पक्ष में तो होंगे ही। अगर आप हमें और इस भारत को…


जब महापर्व छठ पर पूरे परिवार में जश्न का माहौल हो जाता है!

बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश का महापर्व छठ के आते ही बाहर काम करने वाले बेटे, पति काम से छुट्टी ले ट्रेनों में बोरे की तरह कसकर आते हैं। विदेश रहने वाले परिवार के लोगों…


जीवन में जूझते हुए ईश्वर के पद तक पहुंचते हैं वाल्मीकि के राम

तमसा नदी के तट पर पीपल के वृक्ष के नीचे एक ऋषि विचारमग्न थे। सुबह की वेला में नदी की लहरें शांत थीं। मंद हवा बह रही थी, जिनमें पत्तियां-डालियां हिल-मिल रही थीं। पंछी घोसलों…