आज धर्म के नाम पर है कल जात के नाम पर होंगे ‘कट्टर’
कट्टर आज धर्म के नाम पर है कल जात के नाम पर होंगे ये बात यही नहीं रुकने वाली ये लोग एक घर में भी दो नाम से होंगे वो आज नफरत कर रहे…
कट्टर आज धर्म के नाम पर है कल जात के नाम पर होंगे ये बात यही नहीं रुकने वाली ये लोग एक घर में भी दो नाम से होंगे वो आज नफरत कर रहे…
डंडा जोर घुमाया जाए कि गिल्ली दूर तलक जाए, खाली पांव ही क्यूँ न पूरी दुनिया नापी जाए। इन आँखों में सपने ऐसे ही पलते है, वनांचल के बच्चें मीलों मील चलते हैं। …
वह सुबह कब यहाँ आयेगी ? जब सूनी सड़कों पर बेटी हो निडर घूम – फिर पायेगी । वह सुबह कब यहाँ आयेगी ? मुखौटा पुरुषों का पहनकर दानव वहशी बन डोल रहे लगती…
सत्ता की दलाली या अंतर्रात्मा की आवाज़ लिखूँ? झूठ का साम्राज्य या सच का ख्वाब लिखूँ? क्या लिखूँ? उन्नाव के किसानों का आर्द्र रूदन या बिचौलियों की सरकार लिखूँ? मजदूरों की कुदाल या पूँजीपतियों…