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कविता


पूरी दुनिया नापी जाए

डंडा जोर घुमाया जाए कि गिल्ली दूर तलक जाए, खाली पांव ही क्यूँ न पूरी दुनिया नापी जाए।   इन आँखों में सपने ऐसे ही पलते है, वनांचल के बच्चें मीलों मील चलते हैं।  …


वह सुबह कब यहाँ आयेगी ?

वह सुबह कब यहाँ आयेगी ? जब सूनी सड़कों पर बेटी हो निडर घूम – फिर पायेगी । वह सुबह कब यहाँ आयेगी ?   मुखौटा पुरुषों का पहनकर दानव वहशी बन डोल रहे लगती…


देश के ताजा हालात पर एक प्रश्न- क्या लिखूँ?

सत्ता की दलाली या अंतर्रात्मा की आवाज़ लिखूँ? झूठ का साम्राज्य या सच का ख्वाब लिखूँ? क्या लिखूँ?   उन्नाव के किसानों का आर्द्र रूदन या बिचौलियों की सरकार लिखूँ? मजदूरों की कुदाल या पूँजीपतियों…