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कोरोनिल कोरोना की दवा के प्रचार पर रोक लगेगी या नहीं? जानिये, हाई कोर्ट ने रामदेव को समन क्यों भेजा?

क्या दिल्ली हाई कोर्ट ने कोरोना किट पर रोक लगाई? यह सवाल बेहद हास्यास्पद लग रहा होगा। लेकिन इस सवाल का उत्तर देने के लिए आगे बहुत कुछ सुनना जरूरी है। क्योंकि हाई कोट ने आज दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन यानी डीएमए की याचिका पर रामदेव को समन भेजा है।

एलोपैथी बड़ी है या होमियोपैथी या इलेक्ट्रोहोमियो पैथी या  फिर आयुर्वेद या फिर अन्य कोई मेडिकल साइंस। इस बहस में कौन पड़ना चाहेगा। जब सब के सब कोरोना वायरस जैसी गंभीर बीमारी के आगे झुकते हुए दिखे। हो सकता है कि एलोपैथी के आगे किसी अन्य पैथी को गौड़ मानकर कोविड के इलाज के लिए उसे सरकार ने आगे आने के लिए प्रोत्साहित न किया हो। सत्य भी है कि एलोपैथी के आगे अन्य सारे मेडिकल साइंस की चर्चा शून्य थी। लेकिन कोविड जैसे वायरस के हमले के बाद हर कोई डॉक्टर बन गया। बिना किसी लाइसेंस के। बिना किसी जानकारी के। कोरोना के सिम्पटम्स पर इलाज करने का दावा भी होने लगा। कई सारे विधाओं के चिकित्सकों ने कोरोना की दवा होने का दावा किया।

सत्य है कि अकेले एलोपैथी भी बिना आयुर्वेदिक काढ़े या अन्य किसी उपाय के कोरोना वायरस के इलाज करने में अक्षम दिखाई दी। अब जबकि वैक्सीन पर सवाल उठ रहे हैं औऱ यह लगभग भारत की जनसंख्या पर जिनको यह टीका लगा उनकी संख्या भी नगण्यय है कोई खास डाटा भी उपलब्ध नहीं है कि जिससे इसके कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद यह बताया जा सके कि भारत में वैक्सीन लगने के बाद भी कितने लोगों की मौतें हुईं और क्यों हुईं। इन सबके पहले कोविड 19 की दूसरी लहर ने चिकित्सकों की जानकारी और अस्पतालों की लापरवाही की पोल पट्टी खोल दी। शहरों में लोग बेड के लिए तरसते रहे। गांवों में झोलाछाप डॉक्टर्स ही किसी भी बीमारी के लिए इस दौरान काम आये। उन्हें पीपीईकिट औऱ मास्क की उपलब्धता के बगैर केवल पैसों और नाम के लिए मरीज को बिना किसी चिकित्सीय उपकरण के छूने और इलाज करते देखा गया।

यही सब दौर था कि तथाकथित बाबा रामदेव ने इस समय का भरपूर फायदा उठाया। पिछले साल के आज तक की एक खबर को देखें तो पतंजलि आयुर्वेद के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कंपनी ने 18 अक्टूबर तक 25 लाख कोरोनिल किट बेचे। बाबा रामदेव ने योगा के साथ आयुर्वेद की दुनिया में अपनी कंपनी उतारकर पतंजलि के माध्यम से व्यापार करने का अच्छा खासा अवसर जुटा लिया। मोदी, योगी, अमित शाह, हर्षवर्धन, राजनाथ ये वे नाम हैं जिनसे बीजेपी सरकार चल रही है। इन सबके साथ तथाकथित बाबा रामदेव की इन फोटोज को देखकर आप भी कहेंगे कि रामदेव को इन लोगों के सबंध ने उनके व्यापार को कितना बढ़ाने में मदद की। इन सब मुद्दों पर हमने पिछले एपिसोड में बात की थी। और यही वजह है कि वो कोरोना की दवा के नाम पर विज्ञापन करके आम जनमानस में भ्रम फैलाकर जानबूझकर खिलवाड़ करते रहे औऱ लोग इसे कोरोना की दवा समझकर खरीदते रहे। हालांकि किसी के पास यह डाटा शायद नहीं होगा कि कोरोनिल जैसी आयुर्वेदिक दवा के सहारे कितने लोगों ने कोरोना की जंग जीत ली है। यही चीज एलोपैथी के साथ भी रही, कि अकेले एलोपैथी की टैबलेट के सहारे कितने लोगों ने कोरोना की जंग जीत ली। इसका डाटा भी नहीं मिलेगा। ऐसा मैं दावा के साथ इसलिए कह रहा हूं कि कोरोनिल या एलोपैथिक टैबलेट किसी एक पर किसी का भरोसा नहीं रहा इसलिए ही लोग गर्म पानी, काढ़ा, होमियोपैथिक दवा, विभिन्न आयुर्वेदिक नुस्खे, एलोपैथिक टैबलेट्स में से कॉकटेल बनाकर दिन रात लेते रहे। और किसी तरह बचते रहे।

इस कोरोना के दौर में लेकिन सारी विधाओं के मठाधीशों को अपने-अपने चिकित्सकीय शास्त्रों को साबित करने की जबरदस्त होड़ भी मची रही। और इनको विभिन्न विधाओं के अस्तित्व को चुनौती देना जैसा लगने लगा। शायद इसलिए यह मुद्दा बना कि आयुर्वेद बड़ा या एलोपैथ बड़ा। हालांकि इन सबका कहीं न कहीं इस बीमारी में सामूहिक योगदान से ही कोरोना वायरस से लोग लड़ सके।

मेरे इतनी बड़ी कहानी कहने के पीछे  हाइकोर्ट की उस टिप्पणी की हकीकत को बताना था जिसने जी न्यूज जैसे पोर्टल्स की हेडलाइन बना दी।

जी न्यूज की हेडलाइन है-

बाबा रामदेव के खिलाफ दिल्ली HC पहुंची दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन, अदालत ने कहा- महामारी का इलाज खोजने में समय लगाएं

दरअसल एलोपैथी और आयुर्वेद को लेकर चल रहा विवाद अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है और दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने इसको लेकर याचिका दायर की है. डीएमए ने याचिका में तथाकथित बाबा रामदेव के खिलाफ केस दायर कर उन्हें कोरोनिल टैबलेट को लेकर झूठे दावे और गलत बयानबाजी करने से रोकने की अपील की गई है।

हाईकोर्ट ने डीएमए से कहा ‘आप लोगों को कोर्ट का समय बर्बाद करने के बजाय महामारी का इलाज खोजने में समय लगाना चाहिए। सत्य है कि किसी के ऊपर सवाल उठाना वो भी अपने पद्धति से अलग होकर जिसके बारे में उन्हें ज्ञान न हो, इस कठिन घड़ी में उन्हें कोरोना की दवा ढूंढ़नी चाहिये।

दिल्ली हाई कोर्ट ने भी कोरोनिल को लेकर वही कहा जो हम कहना चाहते हैं कि , ‘रामदेव कहते हैं कि उनको एलोपैथी पर भरोसा नहीं है और उन्हें लगता है कि सब कुछ योग और आयुर्वेद से सही हो सकता है. वह सही भी हो सकते हैं और गलत भी हो सकते हैं. एलोपैथिक किसी के लिए काम करती है और किसी के लिए नहीं, यह सबका अपना-अपना व्यू है. हम इस मामले में नोटिस जारी कर सकते हैं, लेकिन हम रामदेव को रोक नहीं सकते हैं।

हालांकि रामदेव के कोरोनिल को लेकर दी जा रही भ्रामक जानकारी को लेकर उन्हें अब नोटिस जारी होने से विवाद खड़ा हो गया है। अब रामदेव के लिए भी हाईकोर्ट की पहल मुसीबत बन सकती है।

बाबा रामदेव के द्वारा एलोपैथी के डॉक्टरों के खिलाफ बयान के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनके वकील को नसीहत देते हुए कहा कि वह अपने क्लाइंट से कहें कि भविष्य में एलोपैथी के बारे में इस प्रकार का कोई बयान न दें. इस पर बाबा रामदेव के वकील ने कहा कि वो एक सम्मानित व्यक्ति हैं और कोर्ट के आदेश का सम्मान करेंगे. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में हम कोई भी आदेश जारी नहीं कर रहे हैं और हमें पूरी उम्मीद है कि भविष्य में उनके क्लाइंट कोई बयान नहीं जारी करेंगे.

दरअसल रामदेव ने कहा था कि एलोपैथी बकवास और दिवालिया साइंस है। रामदेव ने यह भी कहा था कि एलोपैथिक दवाएँ खाने से लाखों लोगों की मौत हुई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की आपत्ति भरी चिट्टी मिलने के बाद उन्होंने अपना बयान वापस ले लिया था मगर उन्होंने एलोपैथी पर सवाल उठाना जारी रखा था.

इस बयान को लेकर DMA का कहना है कि रामदेव के बयान से तमाम डॉक्टर आहत हुए हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट के दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए) की याचिका पर योगगुरु रामदेव और अन्य को समन भेजने के बाद क्या कोरोनिल के प्रचार पर या कोरोनिल पर रोक लग सकता है? जवाब यह है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में खैर ऐसा नहीं हो सकता। हाइकोर्ट ने नोटिस जरूर दिया है।

डीएमए ने भी हाई कोर्ट से अपील की है कि ‘रामदेव को कोरोनिल किट को लेकर झूठी जानकारी देने से रोका जाए.’ डीएमए का कहना है कि योगगुरु रामदेव का पतंजलि की कोरोनिल किट को कोविड-19 का इलाज बताना ग़लत है.

 

यह भी बताया जा रहा है कि जस्टिस सी. हरि शंकर की अगुवाई वाली बेंच ने रामदेव के अलावा ट्विटर जैसी कई सोशल मीडिया कंपनियों और मीडिया चैनलों से भी जवाब मांगा है.

हाई कोर्ट ने रामदेव की ओर से पेश हुए वकील को मौखिक तौर पर कहा कि वह रामदेव को कहें कि सुनवाई की अगली तारीख़ तक किसी भी तरह का उकसाने वाला बयान न दें.

इस मामले में कोर्ट में अगली सनवाई 13 जुलाई को होगी. रामदेव की कोरोनिल दवाई के कोरोना की दवा बताकर प्रचार पर रोक लगे या नहीं, लेकिन चूंकि रामदेव के कोरोनिल को लेकर जितना प्रचार होना था वो तो हो गया। और वैसे भी कोई चीज जब विवादित होती है तो प्रचार और तेज होता है। लोग उसकी तरफ आकर्षित भी होते हैं और वो हो गया इसलिए ही बाबा के कोरोनिल के प्रचार पर रोक लग भी जाये तो कुछ फायदा नहीं।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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प्रभात
लेखक FORUM4 के संपादक हैं।

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