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रंग

चढ़ा दो तुम मुझ पर केवल और केवल…अपने प्यार का रंग

चलो खेलें हम भी, इश्क़ की होली लाल रंग हमारे इश्क़ का हो नीला रंग तुम्हारे प्यार का पीला हो मेरी बेचैनी का रंग जब तुम न हो कभी मेरे संग भीगा दो प्रेम की नदी में डूब जाऊँ, तुम्हारे संग बन जाओ रांझणा मेरे रिस जाऊँ तुम्हारे मन चढ़ा दो तुम मुझ पर केवल और केवल अपने प्यार का रंग इंतज़ार था, बेताबी थी कब मनाओगे प्यार का जश्न


कविताः भगवे और हरे को मिला एक नया रंग बना दें

-दिगम्बर नासवा रंगों के नए अर्थ … चलो रंगों को नए अर्थ दें नए भाव नए रंग दें   खून के लाल रंग को पानी का बेरंग रंग कहें (रंगों की विश्वसनीयता बरकरार रखने के…