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मोदी सरकार के चार सालः बेमिसाल, कुछ हकीकत कुछ फ़साना, जनता यमला पगला दीवाना

credit: google

विवेक आनंद सिंह

साल 2014 की तपती दोपहरिया में जब मोदी सरकार सत्ता में आई तो किसी को ये अंदाजा भी नहीं था कि अगले 5 सालों में (अभी तो 4 ही हुए हैं) उसे राष्ट्रवाद, देशभक्ति और राष्ट्रहित के रैपर में नए-नए मसाले मिलने वाले हैं।

ऐसा नहीं है कि इन 4 सालों में सिर्फ राजनीति मनोरंजक बनी, बल्कि नए-नए राजनीतिक आयाम भी स्थापित हुए। जैसे अरविंद केजरीवाल जी मिस्टर फनी बने और राहुल गांधी जी ने वैज्ञानिक अविष्कारों की झड़ी लगा दी, जिनमें आलू से सोना बनाने की मशीन मुख्य है ।

इन चार सालों में अन्ना जी  कपिल शर्मा के शो पर गए और इनके जाते ही कपिल और सुनील इंकलाबी हो गए।

कुमार विश्वास जी का विश्वास अरविंद केजरीवाल जी ने तोड़  दिया।

ममता दीदी आज भी ममतामयी बनी हैं (किस पर ममता है ये तो  ऊपरवाला ही जाने )

मायावती जी ने भी अपने साथ हुए लखनऊ गेस्ट हाउस कांड को भुलाकर अखिलेश बबुआ को गले लगा लिया (ध्यान दें मुलायम सिंह यादव जी से अभी भी उचित दूरी बनाई हुई हैं )।

इन्हीं घटनाक्रमों के बीच मोदी जी राष्ट्रहित के कार्यो में भिड़े हुए हैं- निरन्तर विदेश यात्रा, राहुल मुक्त भारत, जिसे आप कांग्रेस मुक्त भारत भी कह सकते हैं, में लगे पड़े हैं । हालांकि लगना नहीं था। ये तो प्रकृति का नियम है ‘परिवर्तन’। जितनी ऊर्जा उन्होंने कांग्रेस मुक्त भारत मे लगाई है, वही ऊर्जा सुरक्षित करते तो देश आज स्वर्ग तक खटिया बिछा चुका होता। ये हिमालयी भूल साबित हुई, हिमालयी भूल से याद आया कि यह भूल अरुणाचल प्रदेश में नेहरू जी ने भी की थी ।

उपलब्धियों के लिहाज से भाजपा ने बहुत झंडे गाड़े, लेकिन बस सरकार बनाने में। बाकी झंडे आज भी पेपर में गड़े हैं जैसे स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन (समझ नही आ रहा बुलेट ट्रेन का ठीकरा किसके सिर फोड़ा जाए, मनमोहन सिंह जी के या मोदी जी के) डेढ़ करोड़ रोजगार, रामराज्य, राम मंदिर ….विथ सो मेनी फलाना एंड फलानी ।

हां, भाजपा ने मोहब्बत-ए-कश्मीर में महबूबा को जरूर पा लिया। बाकी सब खैरियत ही है। युवा अदरक बन चुका है, लेकिन बजट सबसे ज्यादा बॉस को मिला, लेकिन ये साफ नहीं किया गया कि बजट छीले बॉस को ज्यादा मिला है या सादे बॉस को …. इंडिया वांट्स टू नो

बाकी पकौड़ा के जरिए रोजगार देने की मुहिम भी काफी कारगर रही। लाखों युवाओं ने तो स्टार्ट अप पकौड़ा चालू कर दिया है।

ये बीजेपी की दयालुता ही है, इतनी नेक पार्टी इस चराचर संसार मे नहीं है। अटल जी के विश्वास को अमित शाह और मोदी जी ने बनाये रखा है।

अगर मोदी जी तन हैं तो अमित शाह बदन में इनबिल्ट चाणक्य खोपड़ी, जिसको हम उपजाऊ या उर्वर खोपड़ी भी कह सकते हैं। लेकिन, बस कहिए। वो भी मन मे किसी संघ के कार्यकर्ता और भक्त जनों के सामने मत कहियेगा। वरना लट्ठ आपके पश्च पेशानी को तोड़ सकती है।

बाकी मोदी जी ने अम्बानी का भला ऐसे ही किया जैसे  मनमोहन जी ने। बस फर्क इतना है इस भलाई में आज हमें जियो मिला है। हम जी भी रहे हैं।

रामराज्य की शुरुआत तो 2014 से ही हुई है। कुछ बानगियां हाल फिलहाल देखने को मिली जैसे कांग्रेस की सरकार में माल्या को माल मिला और नीरव मोदी को भी मिलने लगा। इन्होंने बस उसके हृदय परिवर्तन करने हेतु चन्दे की दर बनाये रखी। ये तो  नीरव और माल्या की गलती है ना कि वो ससुरे नही सुधरे। आप इसके लिए राम अवतार जी को कैसे दोष दे सकते हैं।

अब नोटबन्दी को ही देखिये, अच्छा कदम था। अम्बेडकर साहब ने भी इसकी सलाह दी थी, लेकिन जब मोदी जी ने ये किया तो सभी बुद्धजीवी, बुद्धिभोजी बन लगे कोसने। कदम बढ़िया था अब लोग एक साथ 10 एटीएम लेकर घुसेंगे तो कोई चक्कर खाके गिरें, किसी को हार्ट अटैक आ जाये तो इसके जिम्मेदार मोदी जी कैसे हो सकते हैं। किसी का बियाह पैसे की वजह से रुक जाए तो मोदी जी नागिन डांस तो करनेवाले नहीं! अगर ऐसा न हुआ होता तो पियवा के पहिले हमार रहलु जैसे श्लोक अस्तित्व में न आये होते।

तो मोदी जी को कोसने से बढ़िया हैं राष्ट्रहित में खुद को न्योछावर करिये और करते रहिये। तब तक करिये जब तक आपकी आत्मा फील गुड न करने लगे।

बस खतरा यही है फील गुड और  इंडिया शाइनिंग के चक्कर मे अटल जी ने अपनी शाइन बिगाड़ ली थी। इसी तरह अच्छे दिन के इंतजार में लोग बेवफा सनम ना गाने लगे। कहीं अगली सरकार अल्ताफ रजा को न मिल जाये।

अब देखिए सर्जिकल स्ट्राइक हुई, लेकिन सब वीडियो मांगने लगें। अब सेना लड़ेगी कि वीडियो बनाएगी? फुद्दू लोग!

बस ये लड़ाई तो सीमा तक ही है, अन्यथा नवाज की बिटिया की शादी में मोदी जी सारा प्रोटोकाल तोड़ के न जाते! खैर गए तो अटल जी भी थे। अनारकली बाजार देखने। जो लोग कहते हैं कि बीजेपी नफरत की राजनीति करती है, वो लोग ध्यान से देखें प्रेम के मामले में बीजेपी रोज़ प्रेमग्रन्थ लिख रही है। अटल जी ने शुरू किया था और मोदी जी ने उसे आगे बढ़ाया…आगे बढ़ता ही रहेगा।

बीजेपी सच्ची धर्मनिरपेक्ष है, देखिये मस्जिद गिरा दी गई। मन्दिर बनने से रहा! देखो सनम! तू मेरी न बन कोई हर्ज नही..तू सलीम की सलमा बनी तो शिकायत होगी!

वैसे भी मन्दिर मस्जिद बनवाने से ज्यादा फायदा उसको न बनवाने में है। धारा 370 खत्म क्यों किया जाए? ज्यादा फायदा तो न खत्म करने में है।

मोदी जी बस सबका साथ सबका विकास कर रहे हैं। हृदय परिवर्तन कर रहे हैं, जैसा गाँधी जी ने अंग्रेजों का किया था। अम्बेडकर ने नेहरू जी का किया था। ये अम्बेडकर बाबा और गांधी जी का उतना ही सम्मान करते हैं जितना हम किताबों की ऐक्नॉलेजमेंट की करते हैं ।

अब सिर्फ 5 सालों में आप मोदी जी से और क्या उम्मीद करते हैं ?

देखिये विकास एक मनोवैज्ञानिक विचार है। आप मानिये कि विकास अभी गर्भ मे है। अब इंसान तो है नहीं कि 9 महीने में जन्म ले। इतना बड़ा देश है 5 साल तो गर्भवस्था चलेगी ही। जैसे जब आपका पहला बच्चा पैदा होता है आप पहले से ही हगीज खरीद के रखते हैं। बेबी आयल बेबी शोप, उसकी डाइट प्लान, गंदा कौन साफ करेगा? ये सब प्लान बनाते हैं। वैसे ही मोदी जी ने प्लान बना लिया है सब कागज पर।

एक बार फिर मोदी सरकार करिये फिर देखिए विकास दांत लिए पैदा होगा।  हां, अगर विकास ने पॉटी की तो उसकी जिम्मेदारी कांग्रेस की होगी। लेकिन, फिर भी देश चांद तक ही नहीं सूरज को भी दीया दिखायेगा, जिसका क्रेडिट बीजेपी को मिलेगा। हां, कहीं बनता ब्रिज गिर जाए तो ये आपकी गलती है कि बनते ब्रिज के पास आप करने क्या गए थे ? बच्चे मरते हैं तो मरेंगे, रेप होता ही रहेगा। कोई नई बात नहीं है ये। अब मोदी जी को जिम्मेदार कैसे बनाओगे?

पकौड़ा का जितना मजे लिए हो न आप, जब उसी पकौड़े से सब पीला-पीला होगा, तब देखना। बस ये सोचना की हर पीली चीज सोना नहीं होती।

नीरव और माल्या की चिंता मत करिये, अभी देश के पास इतना पैसा है कि सभी को दांत में से फंसी धनिया निकालने के लिए रोबोट दिया जा सकता है। हां, कड़ी निंदा को संयुक्त राष्ट्र संघ ने ब्रह्मस्त्र घोषित कर दिया है। दूसरे नम्बर पर परमाणु बम अब भी बना हुआ है।

तो मितरो ….मन की बात सुनिए, क्योंकि  ये मनमोहन सिंह जी की तरह कसैले नहीं हैं, मधुर हैं। प्रेम से सुनिये। लेकिन, ध्यान रहे उखाड़ तो इलेक्शन से पहले वैसे भी कुछ नहीं लोगे आप, क्योंकि ये फकीर हैं। झोला उठा के चल देंगे। फिर आप किसके सहारे जेएनयू में बकैती करेंगे? किसको देशद्रोही बनायेंगे? राष्ट्रवाद वाला सर्टिफिकेट कौन देगा ?

देवा रे देवा! भला मानुस छांगला।

(दिल पर ना लें,दिमाग पर तो कतई ना लें, बस मनोरंजन करें)

नोटः ये लेखक के निजी विचार हैं। फोरम4 का इससे सहमत होना जरूरी नहीं है।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

2 Comments on "मोदी सरकार के चार सालः बेमिसाल, कुछ हकीकत कुछ फ़साना, जनता यमला पगला दीवाना"

  1. बहुत अच्छा व्यंग्य हैं ।

  2. देवा रे देवा! भला मानुस छांगला…..अच्छा व्यंग्य हैं

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