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डीयूः आरक्षण को लेकर अभी तक अध्यादेश नहीं, चुनाव में आरक्षण विरोधी संगठनों का शिक्षक करेंगे विरोध

फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फ़ॉर सोशल जस्टिस की बैठक रविवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी परिसर के कला संकाय में हुई। बैठक में एससी/एसटी शिक्षकों के आरक्षण को लेकर अध्यादेश नहीं लाने की कड़ी आलोचना की गई। साथ ही एसी/ईसी चुनाव में उन राजनैतिक पार्टियों के शिक्षक संगठनों का विरोध किया जाएगा, जिन्होंने अध्यादेश लाने के लिए सरकार पर जोर नहीं डाला जिससे एससी/एसटी के आरक्षण का अध्यादेश ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। बैठक में शिक्षकों की नियुक्तियों को लेकर भी चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता सीनियर प्रोफेसर कैलाश प्रकाश सिंह ने की। मंच का संचालन डॉ. अनिल कुमार ने किया।

बैठक में सभी शिक्षकों का कहना था कि देश की तमाम राजनैतिक पार्टियां एससी/एसटी, ओबीसी को आरक्षण देने का खुला समर्थन करती है परंतु इन राजनैतिक दलों के डीयू में शिक्षक संगठन (टीचर्स सेल) कुछ खुलकर तो कुछ दबे स्वर में आरक्षण का विरोध करते हैं। ये शिक्षक संगठन जब-जब चुनाव आते हैं आरक्षण का मुद्दा गरमाकर उनके वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास करते हैं।

फोरम के चेयरमैन और डीयू विद्वत परिषद के सदस्य प्रो. हंसराज ‘सुमन’ ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यूजीसी के 5 मार्च 2018 के पत्र के कारण देशभर के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं। पत्र में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सुझाव को निर्देश के रूप में पालन करने को कहा है जिसमें यह सुझाव है कि विश्वविद्यालय व कॉलेजो में विभागवार रोस्टर बनाने का नियम है। भारत सरकार के द्वारा अभी तक इस पत्र को वापिस नहीं लिया गया है, जिससे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षकों में इसको लेकर काफी विरोध है। उनका कहना है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों और संबंधित कॉलेजों में विभागवार रोस्टर बनाकर अनुचित तरीके से नियुक्तियां की जा रही हैं उसमें केंद्र सरकार के आरक्षण नियमों की पूरी तरह से अवहेलना की जा रही है।

बैठक में डॉ. अनिल काला ने अपने विचार रखते हुए कहा कि डीयू में एसी और ईसी के चुनावों को लेकर तमाम शिक्षक संगठन अभी से अपनी गोटियां बिछाने की कोशिश में लग गए हैं।उनका कहना था कि इस चुनाव में आरक्षण को लेकर राजनैतिक दलों के शिक्षक संगठनों की क्या राय है, यह जानने के लिए खुली परिचर्चा हो। ऐसे शिक्षक संगठन जो आरक्षण का विरोध करें उसे वोट ना करने की अपील एससी, एसटी, ओबीसी शिक्षकों से करें।

डॉ. विनय कुमार ने अपने विचार रखते हुए सुझाव दिया है कि एसी और ईसी चुनाव के समय फोरम को आरक्षण को लेकर एक प्रश्नावली तैयार करनी चाहिए। इस प्रश्नावली के माध्यम से यह जानने की कोशिश की जाए कि आपके शिक्षक संगठन ने आरक्षण पर आपकी पार्टी ने सरकार के सामने अपना पक्ष क्यों नहीं रखा, साथ ही अध्यादेश लाने के लिए सरकार पर जोर क्यों नहीं डाला।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर कैलाश प्रकाश सिंह ने शिक्षकों को अपने संबोधन में कहा कि केंद्र की सरकार आरम्भ से ही अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के आरक्षण के खिलाफ रही है। सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों में विश्वविद्यालयों/कॉलेजों/शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी व ओबीसी कोटे के पदों को भरने के बजाय उन्हें समाप्त किया है। उनका कहना था कि 5 मार्च 2018 का पत्र इसका प्रबल उदाहरण है, जिसमें यूजीसी के माध्यम से संस्थाओं में विभागवार रोस्टर लागू करके बैकलॉग पदों को समाप्त किया जा सके।

प्रो. सिंह ने आगे कहा कि केंद्र सरकार ने 7 माह पहले कहा था कि हम एससी, एसटी के आरक्षण को लेकर एक अध्यादेश लाएंगे जिससे कि नियुक्तियों में आरक्षण की अवहेलना न हो सके, लेकिन अभी तक केंद्र सरकार वह अध्यादेश लेकर नहीं आई है जबकि कुछ विश्वविद्यालयों ने सरकार व कोर्ट के निर्णय को ना मानते हुए पिछले दिनों नियुक्तियां भी कर लीं। इन नियुक्तियों में खुलेआम आरक्षण नियमों का उल्लंघन हुआ है। उनका कहना है कि इन विश्वविद्यालयों की एक सूची तैयार करके मीडिया में सार्वजनिक की जाए ताकि लोगों को पता चले। उन्होंने संगठन के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाने के लिए रैली या धरना प्रदर्शन करने का प्रस्ताव रखा।

बैठक में अनेक शिक्षकों का कहना था कि यदि केंद्र सरकार एससी, एसटी के आरक्षण को लेकर यथाशीघ्र अध्यादेश नहीं लाती है तो एससी, एसटी के शिक्षक संगठन मिलकर 2019 के आम चुनावों का खुलकर विरोध करेंगे। फोरम ने यह भी निर्णय लिया है कि यदि डूटा एससी, एसटी के अध्यादेश और आरक्षण के लिए पहल नहीं करती है तो आरक्षित वर्गों के शिक्षक आने वाले एसी/ईसी और डूटा के चुनाव में भाग नहीं लेंगे। सभी शिक्षकों ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि इसे लेकर शिक्षकों के बीच जाएंगे। डॉ मनोज कुमार, डॉ अनिल कुमार और डॉ. विनोद कुमार ने भी अपने विचार रखें। इसके बाद डॉ. सुरेश कुमार ने सभी का धन्यवाद किया।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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