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मिशन शक्ति- नासा ने परेशान होकर कहा कि भारतीय सैटेलाइट के नष्ट होने से आईएसएस को खतरा

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तस्वीर- गूगल साभार

नासा प्रमुख ने कहा कि 10 सेमी या उससे बड़े 60 टुकड़ों को ट्रैक किए जो आईएसएस के पास चक्कर लगा रहे हैं। अमेरिकी सेना ने अब तक कई सैटेलाइट्स के 10 सेमी से बड़े 23 हजार टुकड़े ट्रैक किए हैं। भारत ने 27 मार्च को ए-सैट टेस्ट में लाइव सैटेलाइट नष्ट किया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस बात की जानकारी दी थी।

अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत के एंटी-सैटेलाइट क्लब में शामिल होने से अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की परेशानी बढ़ गई है। नासा ने मिशन शक्ति को बेहद ‘भयानक’ मानते हुए कहा है कि इस परीक्षण के कारण अंतरिक्ष की कक्षा में मलबे के करीब 400 टुकड़े फैल गए हैं। भारत के इस कदम से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों के लिए नया खतरा पैदा हो गया है। हालांकि सच्चाई यह है कि तीन महाशक्तियों ने पूर्व में जो प्रयोग किए हैं उनमें इससे कहीं ज्यादा मलबा अंतरिक्ष में फैल चुका है।

बता दें कि भारतीय रक्षा अनुसंधान संस्थान (डीआरडीओ) ने 27 मार्च को एंटी-सैटेलाइट (ए-सैट) मिसाइल का टेस्ट किया था। इस दौरान 300 किलोमीटर दूर पृथ्वी की निचली कक्षा में लाइव सैटेलाइट को नष्ट करने में कामयाबी मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात की जानकारी दी थी। मोदी ने कहा था कि इस परीक्षण से भारत ने अंतरिक्ष ताकत के रूप में खुद को स्थापित किया है। पूर्णत: स्वदेशी यह एंटी-सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण चिर-प्रतिद्वंद्वियों पाकिस्तान और चीन के लिए कड़ा संदेश भी माना जा रहा है।

भारतीय सैटेलाइट के 60 टुकड़े ट्रैक किए गए

नासा प्रमुख जिम ब्राइडनस्टाइन अपने कर्मचारियों को संबोधित कर कर रहे थे। उन्होंने कहा, “हम भारतीय सैटेलाइट के टुकड़ों को ट्रैक करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अब तक हमने 10 सेमी या उससे बड़े 60 टुकड़ों को ट्रैक किया है।” यह सैटेलाइट आईएसएस से नीचे स्थित था।

ब्राइडनस्टाइन के मुताबिक, “24 टुकड़े आईएसएस के पास चक्कर लगा रहे हैं, यह खतरनाक साबित हो सकते हैं। चिंता की बात यह है कि सैटेलाइट नष्ट किए जाने के बाद मलबा आईएसएस के ऊपर पहुंच गया है। इस तरह की गतिविधियां भविष्य में मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए अच्छी साबित नहीं होंगी। यह हमें स्वीकार्य नहीं है। नासा का रुख इस मामले में काफी स्पष्ट है।”

वहीं, अमेरिकी सेना के मुताबिक- अब तक 10 सेमी से बड़े करीब 23 हजार टुकड़े ट्रैक किए गए हैं। ये टुकड़े मलबे के रूप में फैले हैं। इनमें 3 हजार टुकड़े 2007 में चीनी एंटी-सैटेलाइट टेस्ट में निकले थे।

नासा चीफ ने यह भी कहा कि आईएसएस से टुकड़ों के टकराने का खतरा 44% तक बढ़ चुका है। हालांकि यह खतरा समय के साथ कम हो जाएगा क्योंकि वायुमंडल में प्रवेश के साथ ही मलबा जल जाएगा।

अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजना होगा मुश्किल

नासा प्रमुख जिम ब्रिडेन्टाइन ने कहा, यह भयानक, बेहद भयानक है कि ऐसा काम किया गया जिससे मलबा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से भी ऊपर जा रहा है। इसकी वजह से भविष्य में मानव को अंतरिक्ष में भेजना मुश्किल होगा।

उन्होंने कहा, ‘जब एक देश ऐसा करता है तो दूसरे देशों को भी लगता है कि उन्हें भी ऐसा करना चाहिए, यह अस्वीकार्य है। नासा को इस बारे में स्पष्ट रुख अपनाने की जरूरत है कि इसका हम पर क्या असर पड़ता है।’

अंतरिक्ष में पहले से हैं मलबे के 10,000 टुकड़े

नासा प्रमुख के मुताबिक फिलहाल अमेरिकी संस्था ऐसे 23,000 लक्ष्यों पर नजर रखे हुए है जिनका आकार 10 सेंटीमीटर से ज्यादा है। इसमें 10,000 टुकड़े अंतरिक्ष मलबे के भी शामिल हैं। इनमें से तीन हजार सिर्फ चीन द्वारा 2007 में किए गए ऐसे ही प्रयोग की वजह से फैले थे। अब भारतीय परीक्षण के बाद मलबे के अंतरिक्ष स्टेशन से टकराने के चांस 44 प्रतिशत बढ़ गए हैं। हालांकि, मलबे के वायुमंडल में प्रवेश करने के बाद यह खतरा कम हो जाएगा।

मिशन शक्ति क्या है?

27 मार्च 2019 को, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पहले उपग्रह रोधी हथियार के सफल प्रक्षेपण की घोषणा की। इंटरसेप्टर ने पृथ्वी की निचली कक्षा में 300 किलोमीटर (186 मील) की ऊँचाई पर एक परीक्षण उपग्रह को मार गिराया। इस प्रकार उपग्रह रोधी हथियार मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण हुआ।

इंटरसेप्टर को ओडिशा के चांदीपुर में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) में लगभग 05:40 यूटीसी पर प्रक्षेपित किया गया और 168 सेकंड के बाद इसने अपने लक्ष्य माइक्रोसैट-आर को हिट किया। इस ऑपरेशन को मिशन शक्ति नाम दिया गया था।

मिसाइल प्रणाली को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (भारतीय रक्षा सेवाओं के अनुसंधान विंग) द्वारा विकसित किया गया था। इस परीक्षण के साथ, भारत उपग्रह रोधी मिसाइल क्षमताओं वाला चौथा राष्ट्र बन गया। भारत ने कहा कि यह क्षमता एक निवारक है और किसी भी राष्ट्र के खिलाफ निर्देशित नहीं है।

परीक्षण के बाद जारी एक बयान में, भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि परीक्षण को पृथ्वी की निचली कक्षा में किया गया हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि परीक्षण से उत्पन्न मलबा कुछ ही हफ़्ते में पृथ्वी पर वापिस आ जाए।

परीक्षण के बाद, संयुक्त राज्य ने दोहराया कि भारत के साथ अंतरिक्ष सुरक्षा सहित अंतरिक्ष में साझा हितों को आगे बढ़ाने का इरादा रखता हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने संबोधन में ऐलान किया कि भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में दुनिया की चौथी महाशक्ति बन गया है।

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