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डीयूः अभी भी कॉलेजों में आरक्षित वर्ग के छात्रों की सीटें खाली, स्पेशल ड्राइव चलाने की उठी मांग

गूगल : आभार

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से संबद्ध कॉलेजों के विभिन्न विभागों के स्नातक पाठ्यक्रमों में अभी भी आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए सीटें खाली हैं। इन खाली पड़ी सीटों को भरने के लिए डीयू की विद्वत परिषद के सदस्य व एडमिशन कमेटी के सदस्य प्रो हंसराज सुमन ने डीयू के प्रो कुलपति, कुलसचिव व एडमिशन कमेटी के चेयरमैन से पुनः स्पेशल ड्राइव चलाने की मांग की है। साथ ही उनसे यह भी मांग रखी है कि वे पहले कॉलेजों से आंकड़े मंगवाएं कि अभी तक कॉलेजों ने आरक्षित वर्गों (एससी, एसटी, ओबीसी व विकलांग छात्रों की खाली पड़ी सीटों को) की कितनी सीटें भरी है और कितनी खाली है। इसका पूरा विवरण एडमिशन कमेटी को भेजें।

प्रो. सुमन ने बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने कॉलेजों में 13अगस्त से 16 अगस्त तक एससी, एसटी, ओबीसी और विकलांग छात्रों की सीटें भरने के लिए स्पेशल ड्राइव चलाया था लेकिन, स्पेशल ड्राइव के बाद भी कॉलेजों में इन वर्गों की अभी भी सीटें खाली पड़ी हुई है। इन सीटों का खाली रहने का कारण बताते हुए प्रो. सुमन ने बताया है कि कॉलेजों की एडमिशन कमेटी ने आरक्षित वर्गों की सीटें भरने के लिए अंकों की छूट में कमी नहीं की, यदि कॉलेज प्रतिशत में छूट देते तो ये सीटें खाली नहीं रहती।

कॉलेजों में सामान्य वर्ग के छात्रों के अनुरूप सीटें नहीं भरी जाती

उनका कहना है कि कॉलेजों ने अपने यहां सभी कोर्सों में स्वीकृत सीटों से ज्यादा सीटें सामान्य वर्गों की भरी हुई है। कॉलेजों में हर साल एससी, एसटी, ओबीसी और पीडब्ल्यूडी कोटे के छात्रों की सीटें खाली रहती हैं। इसका कारण कॉलेजों द्वारा सामान्य वर्गों के छात्रों के अनुरूप सीटें नहीं भरना साथ ही आरक्षित वर्गो के छात्रों की कट ऑफ उच्च रखना है। उनका कहना है कि कोई भी कॉलेज सामान्य वर्गों के छात्रों के अनुरूप सीटें नहीं भरते बल्कि जो स्वीकृत सीटें हैं उसी आधार पर कॉलेज प्रवेश करते हैं। उनका कहना है कि कॉलेजों से जल्द से जल्द आंकड़े मंगाकर पता लगाया जाये कि कितनी सीटें खाली है, और फिर से डीयू की एडमिशन कमेटी स्पेशल ड्राइव चलाकर सीटें भरे।

प्रो. सुमन ने एडमिशन कमेटी के चेयरमैन को सुझाव दिया है कि जिन छात्रों ने किसी भी कोर्स में अभी तक आवेदन नहीं किया है उन्हें स्पेशल ड्राइव से पहले आवेदन कराएं, जिससे आरक्षित वर्ग के अन्य उम्मीदवारों को भी स्पेशल ड्राइव का लाभ मिल सके। इससे आरक्षित वर्ग की सीटें खाली नहीं रहेगी।

कॉलेजों ने स्वीकृत सीटों से ज्यादा लिया दाखिला

प्रो सुमन ने बताया है कि कॉलेजों ने अपने यहां स्वीकृत सीटों से ज्यादा पर दाखिला लिया हुआ है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया है कि किसी ऑनर्स कोर्स में 46 स्वीकृत सीटें है, जिसमें 23 सीटें सामान्य वर्गों की बनती है लेकिनं इस एवज में कॉलेज ने 40 या उससे अधिक पर सामान्य वर्ग की सीटे भर ली गई हैं। उसी को आधार मानकर एससी, एसटी, ओबीसी कोटे की सीटें भरे।

सामान्य सीटों की एवज में कोटा दे कॉलेज

प्रो. सुमन ने एडमिशन कमेटी को बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में 56 हजार सीटों की एवज में प्रति वर्ष 65 से 70 हजार सीटों पर दाखिला होता है। उनका कहना है कि 10 फीसद सीटें तो स्वयं कॉलेज बढ़ा लेते हैं और जो छात्र कटऑफ में आ जाते हैं उन सभी को प्रवेश देने का नियम है तो ज्यादा दाखिला होते ही है क्यों? कॉलेज सामान्य छात्रों की एवज में एससी, एसटी और ओबीसी कोटे के छात्रों को एडमिशन नहीं देते, वे इस नियम का खुलेआम उल्लंघन करते हैं।

31 अगस्त तक चलाए स्पेशल ड्राइव

प्रो सुमन ने बताया है कि कमेटी के सामने 31 अगस्त तक स्पेशल ड्राइव चलाने की मांग रखी है। उनका कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय आरक्षित वर्गों की खाली सीटों को भरने के लिए पहले कॉलेजों से आंकड़े मंगवा रहा है कि आखिर कितनी सीटें खाली हैं और ये क्यों खाली रहती है। प्रो सुमन ने बताया है कि कॉलेजों की मंशा कटऑफ डाउन करने की नहीं है, जिससे आरक्षित वर्गों के छात्रों की सीटें खाली रह जाती है।

दिल्ली विश्वविद्यालय कॉलेजों को जारी करे सख्त निर्देश

उनका कहना है कि विश्वविद्यालय कॉलेजों को यह निर्देश दे कि एससी, एसटी और ओबीसी कोटे की सीटों को भरने के लिए अंकों का फीसद कम करके कटऑफ जारी करें ताकि जो सीटें खाली है वे पूर्ण रूप से भरी जा सकें। उनका यह भी कहना है कि हर साल डीयू कॉलेजों में आरक्षित वर्गों के छात्रों की सीटें खाली रह जाती है। बाद में कॉलेजों की ओर से यह कहा जाता है कि आरक्षित वर्गों के छात्र मिल नहीं पाते हैं, इसलिए सीटें खाली रह जाती है जबकि कॉलेज अपनी कटऑफ नीचे नहीं करते हैं। उनका यह भी कहना है कि जो कॉलेज आरक्षित वर्ग की सीटों को नहीं भरेंगे उनका अनुदान काटने के लिए यूजीसी व एमएचआरडी को पत्र लिखकर मांग करेंगे कि ऐसे कॉलेजों का अनुदान बंद करें जो छात्रों का प्रवेश में कोटा पूरा नहीं करते।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

2 Comments on "डीयूः अभी भी कॉलेजों में आरक्षित वर्ग के छात्रों की सीटें खाली, स्पेशल ड्राइव चलाने की उठी मांग"

  1. बहुत सुंदर जानकारी दी है भैया….हक़ीक़त में हाल बुरा है।

  2. बहुत सुंदर जानकारी दी है कालेज अपनी नाक ऊचीं रखते है ।

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