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राष्ट्रीय

ऑफ द ईयर (व्यंग्य)       

ऑफ द ईयर की धूम मची है। विगत वर्ष में हिंदी साहित्य में तब सनसनी मच गयी थी जब कुछ प्रयोगधर्मी लोगों ने वर्ष घोषित करने की मांग की। इस वर्ष देखिये वो लोग हिंदी…


हम दिखा देंगे: दिलीप कुमार का व्यंग्य

चुनाव नजदीक है तो हर कोई देखने-दिखाने की बात कर रहा है। जनता नेताओं से कह रही है हम तुम्हें दिन में तारे दिखा देंगे और नेता जनता के चरण रज तलाश रहे हैं। मीडिया…


महिलाओं के दायरे सीमित करना सोची समझी रणनीति तो नहीं

महिला, मतलब अनेक रूपों में समाहित एक कार्यरत स्त्री। जिसे हर समय समाज में बेहतर वातावरण देने का प्रयास किया जाता रहा है। महिलाओं को हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी को बढ़ावा दिया जाता रहा है। जो महिलाएं…


सज्जन है गोटः दिलीप कुमार का व्यंग्य

इधर अमिताभ बच्चन अम्बानी की बेटी की शादी में बारातियों को खाना परोसते नजर आए तो केटरिंग सर्विस वालों की बांछे खिल उठीं। लाजपत नगर का एक बंदा कह रहा था कि हम अमिताभ को…