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व्यंग्य

यक्ष इन पुस्तक मेला (व्यंग्य)

दिल्ली का पुस्तक मेला समाप्त हो चुका था। धर्मराज युधिष्ठिर हस्तिनापुर के अलावा इंद्रप्रस्थ के भी सम्राट थे। अचानक यक्ष प्रकट हुए, उन्होंने सोचा कि चलकर देखा जाये कि धर्मराज अभी भी वैसे हैं या…

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हम दिखा देंगे: दिलीप कुमार का व्यंग्य

चुनाव नजदीक है तो हर कोई देखने-दिखाने की बात कर रहा है। जनता नेताओं से कह रही है हम तुम्हें दिन में तारे दिखा देंगे और नेता जनता के चरण रज तलाश रहे हैं। मीडिया…


महिलाओं के दायरे सीमित करना सोची समझी रणनीति तो नहीं

महिला, मतलब अनेक रूपों में समाहित एक कार्यरत स्त्री। जिसे हर समय समाज में बेहतर वातावरण देने का प्रयास किया जाता रहा है। महिलाओं को हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी को बढ़ावा दिया जाता रहा है। जो महिलाएं…


सज्जन है गोटः दिलीप कुमार का व्यंग्य

इधर अमिताभ बच्चन अम्बानी की बेटी की शादी में बारातियों को खाना परोसते नजर आए तो केटरिंग सर्विस वालों की बांछे खिल उठीं। लाजपत नगर का एक बंदा कह रहा था कि हम अमिताभ को…