बुधवार को जेट एयरवेज़ ने अमृतसर से मुंबई तक आखिरी उड़ान भरी। एयरलाइन पर एक अरब डॉलर (तकरीबन 7000 करोड़ रुपये) से ज़्यादा का कर्ज़ है और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के नेतृत्व वाले देनदारों ने कंपनी को इमरजेंसी कर्ज़ देने से इनकार कर दिया है। गुरुवार को जेट एयरवेज़ के सैकड़ों कर्मचारियों और उनके परिवारों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया।
आप को बता दें कि भारत के ही प्रमुख एयरलाइन में से एक किंगफ़िशर एयरलाइन कंपनी के मालिक विजय माल्या भी इसी के शिकार रह चुके हैं। विजय माल्या मार्च 2016 से भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे। उन पर आरोप हैं कि उन्होंने अपनी किंगफ़िशर एयरलाइन कंपनी के लिए तक़रीबन 10 हज़ार करोड़ रुपये बैंकों से कर्ज़ लिया और उसे बिना चुकाए वे लंदन भाग गए। उसके बाद 2016 से किंगफ़िशर एयरलाइन मालिक विजय माल्या को भारत ब्रिटेन से प्रत्यर्पण करने का प्रयत्न कर रहा है।
हालाँकि एक समय था जब भारत में जेट एयरवेज पहले पायदान पर काबिज़ था लेकिन, आज उसकी हालत ऐसी हो गई है की उसे अपने सभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द करना पड़ गया है। इसी क्रम में बुधवार को उसने आखिरी उड़ान भरी। फ़िलहाल अनिश्चित समय के लिए सभी उड़ने रोक दिया गया है।
जेट एयरवेज़ में पिछले कुछ महीनों से आर्थिक परेशानियों की खबरें आने शुरू हो गई थीं और लोगों की सैलरी में देरी होनी लगी। इसके चलते धीरे-धीरे सभी वायुयानों को रद्द करने पड़े थे। इंडियन एक्सप्रेस में छपे खबर के अनुसार जेट एयरवेज़ एयरलाइन बंद होने के चलते लगभग 16,500 कर्मचारियों का नौकरी अब खतरे में हैं। वहीं जनसत्ता समाचार पत्र में छपे खबर के मुताबिक जेट एयरवेज ने बैंको से तक़रीबन 400 करोड़ का कर्ज माँगा था, जिसे बैंकों ने खारिज कर दिया।
खबरों और जानकारों का मानना है कि जेट एयरवेज़ की आर्थिक चुनौतियों के लिए डॉलर के मुकाबले रुपए में कमज़ोरी, स्पाइस जेट, इंडिगो जैसी सस्ते किरायों वाली एयरलाइन्स से प्रतिस्पर्धा, तेल के दामों में उथल-पुथल जैसे कारणों के चलते सभी उड़ने रद्द करने पड़े हैं।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे जेट एयरवेज़ के कर्मचारियों ने केंद्र सरकार को अच्छे दिन लाने के बारें में गुहार लगाते हुए सवाल किया कि मोदी जी क्या यही अच्छे दिन हैं जहां हम अपने रोजी-रोटी और बच्चों के पालन पोषण के लिए दर-दर भटक रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान कई लोगों ने कहा कि अगर हमारी समस्या दूर नहीं किया जाता है तो हम और हमारे परिवार में से कोई वोट देने कोई नहीं जाएगा। बहरहाल सरकार को इसे गंभीरता से लेने की ज़रूरत है। जेट एयरवेज़ एयरलाइन आज जिस हालत में हैं उसे बाहर निकलने का काम भारत सरकार को जेट एयरवेज़ निवेशकों और मालिकों से मिलकर इसका निर्णायक रास्ता निकलना चाहिए।


Be the first to comment on "जेट एयरवेज एयरलाइन मालिक, विजय माल्या की तरह फ़रार तो नहीं होंगे?"