दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध विभागों एवं कॉलेजों में शैक्षिक सत्र 2020-21 में स्नातक, स्नातकोत्तर और एमफिल/पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश के लिए पंजीकरण प्रक्रिया 22 जून से शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार दाखिले के लिए पंजीकरण शुल्क आरक्षित श्रेणी में ओबीसी के उम्मीदवारों से सामान्य वर्ग के छात्रों के बराबर पंजीकरण शुल्क लिया जा रहा है। जबकि ईडब्ल्यूएस के लिए पंजीकरण शुल्क एससी व एसटी उम्मीदवारों के बराबर लिया जा रहा है। इस तरह के पंजीकरण शुल्क में भेदभाव का आरोप लगाते हुए डीयू के छात्र व शिक्षक विरोध कर रहे हैं। इस संबंध में जहां फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फ़ॉर सोशल जस्टिस ने कुलपति से शुल्क में भेदभाव न किये जाने की मांग की है। वहीं डीयू के छात्र संगठन एसएफआई ने कुलपति को ज्ञापन सौंपा है। जबकि लॉ से स्नातक कर रही छात्रा अमिशा ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को पत्र लिखा है।
फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फ़ॉर सोशल जस्टिस ने ओबीसी कोटे के उम्मीदवारों व सामान्य वर्गों के उम्मीदवारों से बराबर पंजीकरण शुल्क लिए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की है और कहा है कि ओबीसी कोटे के होने का उन्हें लाभ न देना उन्हें उच्च शिक्षा से वंचित करना है तथा सामाजिक न्याय के सिद्धांतों की सरेआम अवहेलना करना है। इस संबंध में डीयू के विद्वत परिषद के पूर्व सदस्य प्रोफ़ेसर हंसराज ‘सुमन’ ने बताया है कि एमफिल/पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश से पूर्व पंजीकरण कराने वाले सामान्य वर्ग और ओबीसी कोटे के उम्मीदवारों से बराबर आवेदन शुल्क लिया जा रहा है। ओबीसी कोटे के अंतर्गत आवेदन करने का उन्हें क्या लाभ ? उन्हें मंडल कमीशन के माध्यम से दिया गया उच्च शिक्षा में 27 फीसदी आरक्षण का मजाक उड़ाने जैसा है। उन्होंने डीयू कुलपति से इस संदर्भ में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए बताया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी ) से आवेदन फॉर्म भरने का शुल्क- 750 रुपये लिया जा रहा है। वहीं एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों से 300 रुपये रखा गया है।

स्नातक के बुलेटिन में फीस विवरण

स्नातकोत्तर के छात्रों के लिए बुलेटिन

एमफिल-पीएचडी के छात्रों के लिेए बुलेटिन
ईडब्लूएस के लिए पंजीकरण शुल्क ओबीसी से कम क्यों?
प्रोफेसर हंसराज सुमन ने कहा है कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आने वाले ईडब्ल्यूएस छात्रों की वार्षिक आय 8 लाख रुपये रखी गई हैं तो वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों की भी 8 लाख रुपये हैं तो ऐसी स्थिति में ईडब्ल्यूएस छात्रों से पंजीकरण शुल्क कम क्यों है? उनका कहना है कि ओबीसी आरक्षण दिल्ली विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा में 2007 से लागू है जबकि ईडब्ल्यूएस के लिए 10 फीसदी आरक्षण केंद्र सरकार ने 2019 में लागू किया। जिन वर्गों को 13 साल से आरक्षण का लाभ मिल रहा है उसे सामान्य वर्गों के बराबर पंजीकरण शुल्क रखना सामाजिक न्याय के विपरीत है। उन्होंने कुलपति और कुलसचिव से मांग की है कि आरक्षित श्रेणी के अंतर्गत आने वाली एससी/एसटी/ओबीसी/पीडब्ल्यूडी/ईडब्ल्यूएस के उम्मीदवारों का पंजीकरण शुल्क एक जैसा ही किये जाने के संदर्भ में अधिसूचना जारी की जाए ताकि पंजीकरण कराने वाले उम्मीदवारों को अतिरिक्त शुल्क ना देना पड़े।
एसएफआई ने कुलपति को शुल्क कम किये जाने को लेकर ज्ञापन सौंपा
वहीं इस संबंध में डीयू के छात्र संगठन एसएफआई (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) की ओर से दिल्ली विश्वविद्यालय कुलपति को 21जून को ज्ञापन प्रेषित किया गया। यह ज्ञापन एसएफआई प्रदेश अध्यक्ष सुमित कटारिया व सचिव प्रीतीश मेनन की ओर से दिया गया।

एसएफआई, दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष सुमित कटारिया ने पिछले वर्ष भी इस विषय पर दिल्ली विश्वविद्यालय का ध्यान दिलाया था कि ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों से अधिक शुल्क लिया जाना सामाजिक न्याय को नकारना है। दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया है और कोई कार्यवाही नहीं की है। सुमित ने मांग की है कि ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ हो रहे अन्याय की ओर दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को ध्यान देने और शीघ्र उचित कदम उठाये।
अमिशा ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरपर्सन को पत्र लिखा


Be the first to comment on "डीयू दाखिला 2020- ओबीसी व सामान्य वर्गों के उम्मीदवारों से बराबर पंजीकरण शुल्क लिए जाने का हो रहा विरोध"