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सेक्स, नेटफ्लिक्स सब्सक्रिप्शन के बहाने नागरिकता कानून का समर्थन कराया जा रहा है?

देशभर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब बहुमत की सरकार ने कोई कानून बनाया और उसके विरोध में प्रदर्शन हो रहे हों, मौतें हो रही हों। और इन सबके बाद सरकार एक इंच भी पीछें हटने का नाम न ले रही हो उल्टे ही वह अपने कानून के समर्थन के लिए सड़कों पर प्रदर्शन कर रही हो। इतना ही नहीं इसके लिए तमाम रैली की जा रही हो। सांसदों को भी अपने अपने क्षेत्र में इसके समर्थन के लिए जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा हो। इन सबके अलावा विपक्ष तो प्रदर्शन करने के लिए नए-नए हथकंडे अपना ही रहा है। साथ ही सत्ता के लोग भी आईटी सेल की मदद से और टेलीफोनिक मिस्ड कॉल के जरिए समर्थन जुटाने का प्रयास कर रहे हैं।

लेकिन यह तो सभी देख रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि कुछ लोग इसके समर्थन में तन, मन, धन से इस कदर जुट गए हैं कि वे इसके लिए किसी भी हद तक गिर गए हैं। सेक्स और नेटफ्लिक्स सब्सक्रिप्सन के नाम पर सोशल मीडिया में समर्थन मांगने का तरीका इंसानियत से खेलने का नया तरीका बन गया है। बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट में देशवासियों से नागरिकता संशोधन अधिनियम का समर्थन करने की अपील की गई है। इसके साथ ही 8866288662 नंबर पर मिस्ड कॉल करने की अपील भी की है। बीजेपी ने ट्वीट किया, ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम-2019 को अपना समर्थन देने के लिए 8866288662 नंबर पर मिस्ड कॉल करें।’ इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर कहा, ‘मैं सभी देशवासियों से अपील करता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए अल्पसंख्यकों को न्याय व अधिकार देने वाले सीएए पर अपना समर्थन देने के लिए 8866288662 नंबर पर मिस्ड कॉल दें।’ बीजेपी और अमित शाह ने इस पोस्ट के साथ ‘हैशटैग इंडिया सपोर्ट सीएए’ (#IndiaSupportsCAA) लिखा है।

वहीं, दूसरी ओर बीजेपी के अभियान के खिलाफ विपक्ष ने भी मिस्ड कॉल कैंपेन शुरू किया है। विपक्षी दलों ने सीएए, एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ मिस्ड कॉल कैंपेन के तहत एक नंबर जारी किया है। इसमें अपील की गई है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम-2019, एनआरसी और एनपीआर पर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए 9953588585 पर मिस्ड कॉल करें।’ इसमें संविधान की तस्वीर भी बनाई गई है, जिसके नीचे लिखा है- हम भारत के लोग। इसके साथ ही ‘हैशटैग इंडिया अगेंस्ट सीएए एनआरसी एनपीआर’ लिखा गया।

88662-88662- सेक्स, फ्री नेटफ्लिक्स के नाम पर सीएए सपोर्ट में मिस्ड कॉल ली जा रही है!

शनिवार को सोशल मीडिया में सामने आया कि भाजपा द्वारा जारी इस नंबर का इस्तेमाल तमाम ऑफर्स देने में किया जा रहा है। कुछ वेरीफाइड ट्विटर एकाउंट के साथ फर्जी और बोगस दिखने वाले एकाउंट्स द्वारा इस नंबर पर लड़कियों से बात करवाने, उपहार या ऑफर मिलने की बात कही गई है। इतना ही नहीं ऐसा दावा किया जा रहा है कि आपको नेटफ्लिक्स का 6 महीने का और एप्पल टीवी का 3 महीने का सब्सक्रिप्शन मिलेगा, 1000 जीबी डाटा मिलेगा, लड़कियों से बात करने का मौका मिलेगा। अगर आप T20 वर्ल्ड कप में चाहते हैं कि धोनी इंडिया को लीड करें, तो इस नंबर पर मिस्डकॉल करिए। अगर आपको 15 लाख रुपये चाहिए, तो इस नंबर पर कॉल करिए।  इस नंबर पर कॉल करने से आपको 100 फीसदी नौकरी मिलने की गारंटी है। वगैरह-वगैरह, बातें सोशल मीडिया पर तैर रही हैं। इस तरह के कई स्क्रीन शॉट सोशल मीडिया यूजर्स दिन भर सोशल मीडिया पर शेयर करते नजर आए।

हालांकि जब इस बारे में नंबर को लेकर सवाल उठे, तब कुछ एकाउंट्स ने मजाक करने का दावा किया। कई एकाउंट भाजपा समर्थक होने का दावा करते हैं, साथ ही नंबर को लेकर ऑफर देने वाले एक ट्विटर एकाउंट द्वारा उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फॉलो किए जाने का दावा किया गया है।

वेरीफाइड एकाउंट वाले पवन दुरानी नाम के एकाउंट से अभिनेत्री सनी लियोन और आलिया भट्ट से बात करवाने के लिए लोगों को इस नंबर पर फोन करने के लिए कह रहे हैं। साथ ही, इस अकाउंट से विराट कोहली को बेस्ट क्रिकेटर ऑफ द ईयर घोषित करवाने के लिए भी इस नंबर पर मिस्ड कॉल करने को कहा गया। हालांकि, कई लोगों द्वारा इसको लेकर सवाल उठाने के बाद दुरानी ने ट्वीट डिलीट कर दिया और नंबर को लेकर मजाक करने का दावा किया।

कई ट्विटर एकाउंट से नेटफ्लिक्स सब्सक्रिप्शन दिए जाने का दावा किया जाने लगा। इसके बाद नेटफ्लिक्स इंडिया को इन अफवाहों पर विराम लगाते हुए ट्वीट किया कि उनकी और से ऐसा कोई ऑफर नहीं दिया गया है।

भाजपा की ओर से इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, लेकिन पार्टी पर सीएए के लिए समर्थन जुटाने के लिए गलत तरीके अपनाने के आरोप लग रहे हैं।

गौरतलब है कि नागरिकता कानून को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। बीते दिसंबर में कानून आने के बाद से प्रधानमंत्री और गृहमंत्री द्वारा कई आश्वासनों के बावजूद इसके खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों में कमी नहीं आयी है। इस कानून के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। नागरिकता संशोधन कानून में उन मुसलमानों को नागरिकता देने के दायरे से बाहर रखा गया है जो भारत में शरण लेना चाहते हैं।

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